
मंडला- अब इसे चमत्कार नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे, पानी का एक ऐसा कुंड जहां किसी भी मौसम में चाहे गर्मी हो, ठंडी हो, या फिर बरसात हो वहां का पानी हमेशा गर्म रहता है। और इस कुंड का यही गर्म पानी इसकी सबसे बड़ी खासियत है। इस कुंड के इसी खासियत को लेकर कई बार रिसर्च भी किया जा चुका है। कहते हैं इस कुंड के पानी में कई चिकित्सकीय गुण हैं। कुंड के पानी में नहाने से कई रोग ठीक हो जाते हैं। और इसीलिए ये कुंड दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। दूसरे प्रदेश से भी पर्यटक इस कुंड में नहाने आते हैं। मंडला से कुछ किलोमीटर दूर ये कुंड बड़े पर्यटन के क्षेत्र में उभरकर सामने आ रहा है।
यहां है गर्म पानी का कुंड
गर्म पानी का ये चमत्कारी कुंड मंडला जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बबैहा के अंतर्गत आता है। जिला मंडला के बबैहा गांव में स्थित ये पर्यटन क्षेत्र गरम कुंड जिले में ही फेमस नहीं है, बल्कि इसकी प्रसिद्धि देश के दूसरे प्रदेशों में भी है, और वहां से भी लोग इस कुंड में स्नान करने के लिए पहुंचते हैं।
चमत्कारी है गर्म पानी का कुंड
बबैहा के गरम पानी का ये कुंड नर्मदा के बैंक वॉटर क्षेत्र में स्थित है, और इस कुंड में साल भर गर्म पानी निकलता है। कुंड का पानी साल भर गर्म रहता है इसलिए इसे गर्म कुंड कहा जाता है। अगर आप गर्म पानी के इस कुंड में स्नान करना चाहते हैं तो जब सुविधा लगे तब पहुंच सकते हैं, क्योंकि साल के बारह महीने इस कुंड का पानी गर्म ही रहता है। और इस पानी में वही चिकित्सकीय क्वालिटी होती है। इस चमत्कारी कुंड में चिकित्सकीय क्वालिटी भी है। इस कुंड में स्नान करने मात्र से ही कई तरह के चर्म रोग दूर हो जाते हैं। जिसके चलते भी इस कुंड में लोगों की भीड़ लगी रहती है।
कई बार किया जा चुका है रिसर्च
इस चमत्कारी कुंड को ग्रामीण धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखते हैं। तो वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि कुंड के नीचे सल्फर की चट्टानें होंगी। जिसके चलते कुंड का पानी हमेशा गर्म रहता है। ये पानी कई तरह के चर्म रोगों को दूर करने के लिए बहुत उपयोगी है। प्राकृतिक तौर पर कुंड में गरम पानी होने को लेकर कई बार रिसर्च भी किया जा चुका है।
पर्यटकों को लुभाता है ये कुंड
ठंड के मौसम में यहां का प्राकृतिक गरम पानी पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी पसंद बना रहता है। जिला मुख्यालय मंडला से 22 किलोमीटर दूर मंडला-जबलपुर मार्ग पर बबैहा गांव से अंदर जंगल में ये कुंड स्थित है। चारो ओर पेड़ों से घिरा ये कुंड नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। कुंड के आसपास बरगी डेम का पानी जमा हुआ है। पहले कुंड का लाभ लोगों को बरगी डैम का जलस्तर कम होने पर ही मिलता था। लेकिन कुछ समय बाद यहां कूपनुमा निर्माण करके क्षेत्र को संरक्षित कर लिया गया है। अब लोग साल भर इस चमत्कारी कुंड के पानी का फायदा उठा सकते हैं। इस कुंड में धार्मिक आयोजनों के लिए भी लोग पहुंचते हैं।
इस कुंड का ऐसे हुआ विकास
गरम कुंड के इस स्थल को पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से विकसित किया गया है।
नागरिकों को गरम कुंड में किसी प्रकार की परेशानी न हो इसका पूरा ख्याल रखा गया है। मार्ग से गरम कुंड तक टाइल्स लगाई गई हैं। नागरिकों को धूप, पानी से बचाने और आराम करने के लिए टीन शेड लगाए गए हैं । हलांकि कुंड का विकास तो कर दिया गया है। उसे संरक्षित भी कर दिया गया है। लेकिन कुंड में जाने के लिए जिस रास्ते से लोग जाते हैं उसका हाल खस्ता है।
नेशनल हाइवे से 2 किलोमाटर मार्ग पूरी तरह से जर्जर है। बताया गया है कि मार्ग वन विभाग की जमीन में आने के चलते सड़क की मरम्मत में दिक्कत आ रही है। वहां जाने के लिए सड़क की खस्ताहाल से लोगों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि लोगों की मांग और प्रशासनिक पहल के बाद गरम कुंड का जीर्णद्धार तो कर दिया गया है। लेकिन सुविधाएं अब भी नदारद है। लोगों की जागरुकता के अभाव में कुंड के आसपास गंदगी फैली रहती है। कुंड जाने के लिए मार्ग का मरम्मत करा दिया जाए तो लोगों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा, और ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इस गर्म कुंड का नजारा लेने पहुंचने लगेंगे।
Published on:
14 Apr 2018 02:03 pm
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