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2019 में मोदी को फायदा दे सकता किसानों के लिए उठाया गया ये कदम

धान, मूंग, सोयाबीन, तुअर व उड़द की होती है जिले में अच्छी फसल

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2019 में मोदी को फायदा दे सकता किसानों के लिए उठाया गया ये कदम

शहडोल। केन्द्र सरकार द्वारा घोषित फसलों के समर्थन मूल्य से जिले के किसान लाभान्वित होंगे। हाल ही में सरकार ने खरीफ 2018-19 के लिए नया समर्थन मूल्य तय किया है। जिसके बाद से किसानों को उनके अनाज का वाजिब दाम मिलने की उम्मीद जागी है। समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी को लेकर भारतीय किसान संघ ने कहा है कि केन्द्र सरकार का यह निर्णय निश्चय ही किसानों के लिए हितकर साबित होगा। भारतीय किसान संघ ने यह भी कहा है कि सरकार ने समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी तो कर दी है कि लेकिन खरीदी के बाद किसानों का समय पर भुगतान होगा तभी इस निर्णय का वास्तविक लाभ किसानों को मिल पाएगा। उल्लेखनीय है कि खरीफ 2018-19 के लिए 14 अलग-अलग किस्मों के समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी की गई है।


जिले में 1 लाख 68 हजार किसान
जिले में कुल 1 लाख 68 हजार किसान दर्ज है। इनमें से ज्यादातर किसान मण्डी तक अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं। फिलहाल बोनी का कार्य चल रहा है। जिसके चलते अभी किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है। जैसे ही फसल तैयार हो जाएगी इसके बाद भी किसान अपना-अपना पंजीयन कराएंगे। जिसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि कितने किसानों को किस फसल के बढ़े हुऐ समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा। फिर भी विभागीय अधिकारियों की माने तो जिले के लगभग डेढ़ लाख किसानों को अलग-अलग फसलों के बढ़े हुऐ समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा।
यहां सबसे ज्यादा प्रचलन
केन्द्र सरकार द्वारा खरीफ की प्रचलित 14 फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी की गई है। जिसमें से जिले के किसान सबसे ज्यादा धान, सोयाबीन, मूंग, तुअर व उड़द की ही खेती करते हैं। यही अनाज जिले में चिन्हित खरीदी केन्द्रो में पहुंचती है। इनमें से सबसे ज्यादा समर्थन मूल्य की वृद्धि मूंग व सोयाबीन में हुई है।


किसमें कितनी बढ़ोत्तरी
धान 200
ए ग्रेड धान 180
तुअर 225
उड़द 200
मूंग 1400
सोयाबीन 349
मूंगफली 440
तिल 949
सूरजमुखी 1288
रागी 997
बाजरा 525
ज्वार 705
कपास 1130
इनका कहना है
किसानों का पंजीयन कटाई के समय में होता है। जिले में 1 लाख 68 हजार किसान है जिनमें से लगभग डेढ़ लाख किसानों को अलग-अलग फसल के बढ़ी हुए समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा।
जे एस पेन्द्राम, उप संचालक कृषि शहडोल

किसानों को लागत मूल्य का डेढ़ गुना देने की घोषणा छलावा: राकेश सिंह
किसानों को लागत मूल्य का डेढ़ गुना अधिक दाम देने के समर्थन मूल्य के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई घोषणा देश के किसानों के साथ एक छलावा है। उक्त आशय का आरोप समाजवादी पार्टी के नेता राकेश सिंह बघेल ने लगाते हुए कहा कि घोषणा खरीब के फसलो के समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना देने से किसानों के लागत मूल की भरपाई नही हो पायेगी, यह समर्थन मूल्य ऊट के मुंह में जीरा के समान है। इस समर्थन मूल्य में कृषि फसलों की लागत मूल्य की गणना में किसान के श्रम की कीमत अन्य श्रमिको की कीमत जमीन का किराया व खेती बाड़ी के काम में लगी अस्थायी पूंजी पर ब्याज और रोज बढ़ते हुए डीजल की दरों को पूर्णत: नजर अंदाज कर दिया गया है। सपा नेता राकेश सिंह बघेल ने विलम्ब समर्थन मूल्य घोषित करने की सरकारी व्यवस्था पर सवालिया निशान उठाया है। और कहा है कि फसलों के बोबाई शुरू होने के एक माह पूर्व समर्थन मूल्य घोषित करने की व्यवस्था इसलिए शुरू हुई है कि किसान फसलों को चुनकर बोए, और उसमें लगने वाली लागत व बाजार मूल्य का आकलन कर सके लेकिन 4 जुलाई को बिलम्ब से भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य की घोषणा करने तक किसानों ने धान सोयाबीन राहर मूंग उड़द तिल सहित खरीफ के फसलों की बोबाई कर दी है, अब जबकि सरकार किसानों को निराश करने वाले समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी गई है, तो किसानों में भारी असमंजय का वातावरण है। किसान फायदे और नुकसान को नही समझ पा रहा है। और अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है, यही कारण है कि किसान भाजपा की केन्द्र सरकार की गलत नीतियों का शिकार होकर कर्ज में फंसकर बड़ी संख्या में आत्म हत्या करने की मंजबूर होते है।