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MP Election 2023: सियासत में यूं बढ़ता है सफर, गांव में सीखा राजनीति का ककहरा, अब सदन में बुलंद कर रहे जनता की आवाज

- विधानसभा पहुंचने के लिए सीढ़ी है गांव की राजनीति- अधिकांश विधायक व सांसदों की राजनीति की प्रयोगशाला गांव की राजनीति की थी

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मध्यप्रदेश चुनाव 2023

शुभम सिंह बघेल, शहडोल। विधानसभा पहुंचने के लिए गांव की राजनीति सीढ़ी की तरह काम करती है। कई विधायक व सांसदों के लिए गांव की राजनीति ही पाठशाला है। राजनीतिक दल इनके लिए प्रयोगशाला नहीं, बल्कि पंचायती राज चुनाव हैं। कई ऐसे चेहरे हैं, जो गांव और जिला पंचायत की राजनीति से निकलने के बाद विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कुछ विधायक व सांसद ऐसे भी हैं, जो गांव की सरकार भी चला चुके हैं। गांव की सरकार का नेतृत्व करते हुए राजनीति का गुणा-भाग सीखते हैं।

आदिवासी क्षेत्र की राजनीति पर बात करें तो कुछ नेताओं का नाम यदि अलग कर दिया जाए तो अधिकांश जिला पंचायत और गांव की सरकार चलाने के बाद निकले नेता ही विधान सभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मंडला और डिंडौरी में भी ऐसा ही है। यहां जिला पंचायत की राजनीति में प्रतिनिधित्व करने के बाद राज्यसभा सांसद भी बन चुकी हैं।

संपतिया उइके को इस बार मंडला सीट से भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है। पहले भी वे विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। शहडोल के ब्यौहारी विधायक शरद कोल, जयसिंहनगर विधायक जयसिंह मरावी, उमरिया के विधानसभा क्षेत्र बांधवगढ़ से भाजपा विधायक शिवनारायण सिंह,पुष्पराजगढ़ से कांग्रेस विधायक फुंदेलाल सिंह सहित कई ऐसे नाम हैं, जो जिला पंचायत की राजनीति से ही विधानसभा तक पहुंचे हैं। ये सभी इस बार भी चुनाव मैदान में हैं।

पंचायती राज से इन जनप्रतिनिधियों की शुरुआत

विधायक शिव नारायण सिंह, ब्यौहारी से कांग्रेस के पूर्व विधायक राम पाल सिंह, अनूपपुर विधान सभा क्षेत्र से पूर्व विधायक व कोल विकास प्राधिकरण के रामलाल रौतेल और पुष्पराजगढ़ से कांग्रेस विधायक फुंदेलाल सिंह ने जिला पंचायत की राजनीति से ही विधान सभा तक की डगर तय की है।

इसी तरह संभाग में पूर्व विधायक सुन्दर सिंह, पूर्व विधायक जयराम सिंह मार्को, रामलाल रौतेल, ज्ञानवती सिंह, 2018 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से ब्यौहारी विस में दूसरे स्थान पर रहने वाले तेज प्रताप सिंह भी जिपं में रहे हैं। ये सभी नेता जिला पंचायत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। जयसिंहनगर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी नरेन्द्र मरावी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। जैतपुर से कांग्रेस प्रत्याशी उमा धुर्वे भी जिपं में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

जिला पंचायत से राज्यसभा सांसद, इस बार भी प्रत्याशी

मंडला से संपतिया उइके राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं। वे जिला पंचायत की कमान संभाल चुकी हैं। जिला पंचायत की राजनीति के बाद बड़ी जिम्मेदारी पार्टी ने दी थी। इस बार मंडला विधानसभा से भाजपा ने संपतिया उइके को प्रत्याशी बनाया है।

शरद कोल - जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। ब्यौहारी के मौजूदा विधायक व इस बार प्रत्याशी भी हैं।
रामपाल सिंह- जनपद पंचायत सदस्य से राजनीति शुरू। ब्यौहारी के पूर्व विधायक रहे।
जयराम सिंह मार्को- जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। पूर्व विधायक रहे हैं।
सुंदर सिंह -जिला पंचायत सदस्य और पूर्व विधायक रह चुके हैं।
बली सिंह - सरपंच से शुरुआत हुई थी। ब्यौहारी से विधायक रह चुके हैं।
फुंदेलाल सिंह- जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। मौजूदा विधायक व इस बार प्रत्याशी भी हैं।
रामलाल रौतेल- जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं।
जयसिंह मरावी- जनपद अध्यक्ष से शुरुआत। बाद में मंत्री रहे हैं। अब जैतपुर से प्रत्याशी हैं।
कमला सिंह- जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ पूर्व विधायक भी रह चुके हैं।
शिवनारायण सिंह- जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। मौजूदा विधायक व इस बार प्रत्याशी भी हैं।
रीति पाठक - जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। सीधी सांसद हैं। इस बार प्रत्याशी भी हैं।
संपतिया उइके- सरपंच से शुरुआत। पूर्व राज्यसभा सांसद। इस बार मंडला से प्रत्याशी हैं।
हीरा सिंह श्याम- जनपद पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। इस बार पुष्पराजगढ़ से प्रत्याशी हैं।
चैन सिंह वरकड़े- चैन सिंह वरकड़े निवास नगर परिषद अध्यक्ष रह चुके हैं। इस बार प्रत्याशी हैं।

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