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Mp election 2023: गांव वालों ने किया चुनाव का बहिष्कार, नेताओं को सुनाई खरी खोटी

-बंद हो गया रेलवे फाटक, आवागमन बाधित, राशन के लिए 3 किमी जाना पड़ता है पैदल-वैकल्पिक मार्ग की लंबे अर्से से कर रहे मांग, कहीं नहीं हो रही सुनवाई-सडक़ और बिजली के लिए चुनाव का बहिष्कार कर धरने पर बैठे ग्रामीण, समझाइश के बाद माने

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mp election 2023

शहडोल। विधानसभा क्षेत्र ब्यौहारी की ग्राम पंचायत छतैनी के लगभग 1400 मतदाता सडक़ और बिजली के लिए परेशान है। ग्राम पंचायत छतैनी के देवरीडोल के ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई तो सबसे अनुसना कर दिया। चारो तरफ से प्रयास करने के बाद थक हार कर ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा में मतदान न करने का निर्णय लेते हुए शुक्रवार को भूख हड़ताल में बैठ गए। ग्रामीणों के इस निर्णय की खबर लगते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। आनन-फानन में अधिकारी मौके पर पहुंच गए और ग्रामीणों को समझाइश दी। वरिष्ठ अधिकारियों की समझाइश के बाद ग्रामीण माने और भूख हडताल समाप्त करने के साथ ही चुनाव बहिष्कार के निर्णय को भी बदल दिया है।

रेलवे फाटक बंद होने से आवागमन हो गया बाधित

छतैनी के रहवासियों का कहना है कि रेलवे लाइन होने की वजह से उन्हे सबसे ज्यादा आवागमन में परेशानी हो रही है। पूर्व में रेलवे फाटक से आना जाना होता था लेकिन रेलवे ने फाटक बंद कर दिया है। इससे गांव तक पहुंचने का रास्ता ही बंद हो गया है। गांव में आग लग जाए तो दमकल वाहन आग बुझाने गांव नहीं पहुंच सकता। इसके अलावा कोई भी वैकल्पिक मार्ग अब तक नहीं बनाया गया है। ग्रामीण लगभग दो दशक से सडक़ व बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं।

गांव से बाहर ही खड़े होते हैं वाहन

ग्राम पंचायत छतैनी पहुंचने के लिए कोई ऐसा रास्ता नहीं है जहां से बड़े वाहन गांव में प्रवेश कर सकें। राशन वितरण वाहन भी गांव के बाहर ही खड़ा होता है। हितग्राही लगभग 3 किमी दूर पैदल चलकर रेलवे लाइन के दूसरे पार जाते हैं और वहां से राशन लेकर आते हैं। ट्रैक्टर व अन्य वाहनों को रेलवे लाइन के दूसरे ओर ही खड़ा करना पड़ता है। यहां से दूसरे वाहन की मदद से रेलवे लाइन तक अनाज व अन्य सामग्री ले जाकर रेलवे लाइन के दूसरे ओर खड़े वाहन में लोड करना पड़ता है।

गांव में छाया रहेगा है, लकड़ी जलाकर करते हैं भोजन

ग्रामीणों की माने तो सडक़ के साथ बिजली और पानी की भी समस्या ग्राम पंचायत में बनी हुई है। स्थिति यह है कि पूरे गांव में अंधेरा छाया रहता है। बच्चों की पढ़ाई चौपट है, रात में लकड़ी जलाकर वह भोजन करते हैं। गांव में पानी टंकी बनी है लेकिन लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि मटमैला व गंदा पानी आने की वजह से सप्लाई बंद कर दी गई। इसके बाद कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई। अधिकारियों ने दूसरा बोर कराने आश्वस्त किया था लेकिन अब तक बोर नहीं हो पाया। गांव के सभी लोग पुराने कुएं और हैण्डपंप पर ही निर्भर हैं।

वैकल्पिक मार्ग में जंगल विभाग का रोड़ा

ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ रेलवे लाइन और वैकल्पिक मार्ग में जंगल विभाग रोड़ा बना हुआ है। छतैनी को ब्यौहारी से बरौंधा मार्ग में जोड़ दिया जाए तो आवागमन आसान हो जाएगा। इस मार्ग में पडऩे वाला पुल काफी नीचे है और जलभराव की स्थिति बन जाती है। लगभग 3 किमी का यह मार्ग बनवा दिया जाए तो ग्रामीणों की समस्या का समाधान हो जाएगा लेकिन अब तक इस ओर पहल नहीं की गई है। जंगल विभाग के रोड़े की वजह से यह मार्ग भी अवरुद्ध है।