
अब न कांग्रेस में कोई कद्दावर और न भाजपा में दिग्गज
शहडोल (शुभम बघेल ). अंचल अब कद्दावर नेताओं की कमी से जूझ रहा है। यहां के नेताओं की बात अब दिल्ली और भोपाल में नहीं सुनी जाती। दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस में दिग्गज नेताओं की कमी से जूझ रहे हैं। पिछले एक दशक से कोई भी कद्दावर नेता इस क्षेत्र का नेतृत्व नहीं कर रहे हैं। इसी क्षेत्र से कभी सीएम से लेकर राज्यपाल और केन्द्रीय मंत्री तक हुआ करते थे। अब शिवराज सिंह मंत्रिमंडल तक में जगह नहीं मिलती। शहडोल के सांसद महज के एक ट्रेन के लिए दिल्ली तक दौड़ लगाते हैं लेकिन उनकी बात न तो रेलमंत्री सुनते हैं और न ही रेलवे। दिग्गजों की कमी से जूझ रहे अंचल को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब शहडोल अंचल की राजनीति जबलपुर, भोपाल और रीवा के नेताओं की मोहताज हो गई है। दोनों बड़ी पार्टियों को अब लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए भी बेहतर चेहरा उतारने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। सांसद दलपत सिंह परस्ते के निधन के बाद लोकसभा उपचुनाव के लिए भाजपा के पास कोई विकल्प नहीं था। जिसके बाद ट्राइवल मिनिस्टर ज्ञान सिंह को प्रत्याशी बनाना पड़ा था। अब जबलपुर और रीवा के नेता शहडोल संभाग की राजनीति प्रभावित कर रहे हैं।
पहले कौन-कौन रहे दिग्गज
पंडित शंभूनाथ शुक्ल: विंध्य के सीएम
पंडित शंभूनाथ शुक्ल विंध्य प्रदेश के पहले सीएम थे। इसके बाद मप्र का गठन हुआ। पंडित शंभूनाथ जवाहर लाल नेहरू के काफी नजदीकी थी। इसकी हर बातों को हाईकमान गंभीरता से लेता था।
रणविजय सिंह: कांग्रेस कार्यकाल में गृहमंत्री
रणविजय प्रताप सिंह का देश की बेहतर राजनीति में अच्छी पैठ थी। एक दिग्गज नेता के लिए इन्होने अपनी सीट भी खाली कर दी थी। कांग्रेस कार्यकाल में यह गृहमंत्री भी थे और ये वह समय था जब राजनीति इस अंचल से चलती थी।
केपी सिंह: राज्यपाल और कई बार मंत्री
केपी सिंह राजस्व मंत्री, जेल मंत्री के अलावा कई दशक तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किए थे। इसके साथ ही गुजरात के राज्यपाल थे। केपी सिंह श्यामाचरण शुक्ला व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा के काफी करीबी माने जाते थे।
बिसाहूलाल : पीडब्लूडी और खनिज मंत्री
अनूपपुर क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले बेसाहूलाल सिंह का राजनीति में अच्छा खासा दबदबा था। बिसाहूलाल पीडब्लूडी मंत्री के अलावा ऊर्जा मंत्री और खनिज मंत्री रहे हैं। आदिवासी अंचल में बेहतर पकड़ के लिए भी जाने जाते हैं।
रामकिशोर शुक्ल: विस अध्यक्ष व वित्तमंत्री
पंडित रामकिशोर शुक्ल विधानसभा अध्यक्ष रहने के साथ ही वित्तमंत्री थे। प्रदेश की राजनीति में काफी नाम था। श्यामाचरण शुक्ला व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा के नजदीकी थे और हाईकमान तक इनकी बातों को सुना जाता था।
दलपत सिंह: छग के पूर्व सीएम को हराया
दलपत सिंह परस्ते पांच बार लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए थे। दलपत पूर्व पीएम वीपी सिंह, शरद यादव, जार्ज फर्नाडिज, सुषमा स्वराज के काफी करीबी थे। ये छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भी हरा चुके थे।
दलवीर सिंह: लोस क्षेत्र से केन्द्रीय मंत्री तक
१९७० से राजनीति की शुरूआत करने वाले दलवीर सिंह का देश की राजनीति में काफी दबदबा था। केन्द्रीय मंत्री के अलावा तीन बार लोकसभा में भी निर्वाचित हुए थे। दलवीर सिंह सोनिया गांधी के काफी नजदीक माने जाते थे।
लल्लू सिंह: शहडोल से देते थे कानूनी सलाह
वनविकास निगम के अध्यक्ष थे। विधि प्रकोष्ठ प्रकोष्ठ भाजपा के अध्यक्ष थे। कुशाभाऊ ठाकरे और लालकृष्ण आडवानी के करीबी थे। एक बार विधायक थे, जिसके बाद मप्र उत्कृष्ठ विधायक का सम्मान भी मिला था।

Published on:
06 Jul 2018 02:01 pm
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