
Now every school will get 100 out of 100
शहडोल. सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधार के लिए पहले हर महीने विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाता था, अब नए आदेश के मुताबिक तीन-तीन महीने में मूल्यांकन किया जाएगा। सितंबर महीने का मूल्यांकन अक्टूबर में किया जाएगा। इसके बाद दिसंबर में फिर से मूल्यांकन होगा। स्कूल में उपलब्ध संसाधनों से लेकर बच्चों की ग्रेडिंग और प्राचार्य की पढ़ाई पर निगरानी तक का मूल्यांकन होगा। सभी मापदंडों को 5 से लेकर 50 अंक दिए गए हैं। कुल 100 अंकों पर प्रत्येक स्कूल का मूल्यांकन होगा और अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों का भी इसमें से चयन होगा। हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय ने एकेडमिक मॉनिटरिंग व ग्रेडिंग सिस्टम पर नई व्यवस्था लागू की है। अब प्रत्येक स्कूल की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी। हर तीन महीने में स्कूल के प्रिंसिपल द्वारा एजुकेशन पोर्टल पर अपने स्कूल की एकेडमिक मॉनिटरिंग के नंबर ऑनलाइन जमा करने होंगे। प्रत्येक स्कूल को 100 में से नंबर दिए जाएंगे। इसके लिए पांच अलग.अलग मापदंड तय किए गए हैं। सभी मापदंडों पर खरा उतरने वाले स्कूलों की ग्रेडिंग अच्छी मानी जाएगी जबकि कम अंक पाने वाले स्कूलों को सजा भुगतनी पड़ेगी। हालांकि यह मॉनिटरिंग सितंबर से शुरू होना थी लेकिन सितंबर महीना आदेश के स्कूलों तक पहुंचने में ही निकल गया। अब अक्टूबर और नवंबर महीने की ही ग्रेडिंग हो पाएगी। इसके बाद दिसंबर से फरवरी महीने की मॉनिटरिंग होगी। प्रत्येक तीन महीने में रिजल्ट ऑनलाइन किया जाएगा। शासन ने इस योजना को सफल करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी है।
5 से 50 नंबर तक होगी मार्किंग
1-स्कूल में उपलब्ध साधन और संसाधन के लिए 5 नंबर
2-सीखना, सिखाना और उसका आंकलन के लिए 14 नंबर
3-विद्यार्थियों की प्रगति, उपलब्धि और विकास के लिए 50 नंबर
4-शिक्षकों का कार्य प्रदर्शन और उन्नायन के लिए 18 नंबर
5-स्कूल नेतृत्व और स्कूल प्रबंधन के लिए 03 नंबर
6-समावेशए स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए 03 नंबर
7-समुदाय की सहभागिता के लिए 05 नंबर
8-अलॉटमेंट और स्कूल के लिए उपयोग के लिए 02 नंबर
अटेंडेंस से तय होगा विकास
बताया गया है कि विद्यार्थियों का विकास तय करने के लिए अटेंडेंस को प्रमुख आधार माना गया है। जिन विद्यार्थियों की अटेंडेंस महीने में 18 दिन से ज्यादा होगी उनका विकास बेहतर माना जाएगा। जबकि 10 से कम उपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों का विकास कमजोर की श्रेणी में आएगा। इसके लिए 13 से कमए 14 से 18, 19 से 22 और 22 से ज्यादा अटेंडेंस का मापदंड तय किया गया है।
दस तक देनी ऑनलाइन जानकारी
इस योजना को सफल बनाने के लिए शासन ने प्रिंसिपल को व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी है। अगर इसमें लापरवाही होती है तो प्रिंसिपल पर कार्रवाई की गाज गिरेगी। आयुक्त जयश्री कियावत के मुताबिक जिला शिक्षा अधिकारी को सभी प्रिंसिपल से 10 अक्टूबर तक प्रत्येक बिंदु पर मॉनिटरिंग की जानकारी ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं।
इनका कहना है
यह शासन की काफी महत्वाकांक्षी योजना है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में काफी सुधार होने की पूरी उम्मीद है। सभी प्राचार्यों को दस अक्टूबर तक ऑनलाइन जानकारी देने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
अरविन्द कुमार पाण्डेय, एपीसी, रमसा
Published on:
06 Oct 2018 09:49 pm
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