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अब इस कालेज के लिए मुसीबत बनी डेस्क

जंग लगी व टूटी डुबल डेस्क में बैठने से कतरा रहे छात्र

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Now the trouble desk for this college

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शहडोल। इंजीनियरिंग कालेज की समस्याएं समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। आरजीपीव्ही के लचर रवैये व अनदेखी के चलते इंजीनियरिंग कालेज के छात्रों को आए दिन किसी न किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कालेज में प्रवेश लेने वाले नए बैच को डेस्क की समस्या से जूझना पड़ रहा है। हाल ही में आरजीपीव्ही द्वारा छात्रों को बैठने के लिए डुबल डेस्क का सेट मुहैया कराया गया है। जिसमें से लगभग ८० फीसदी टेबल व बेंच कबाड़ में तब्दील है। इनके कई हिस्से टूटे व जंग लगे हुए है। इनमें से कुछ तो बैठने लायक ही नहीं है और कबाड़ की तरह एक किनारे पड़ी हैं और कुछ को क्लास रूम में सेट तो कर दिया गया है लेकिन छात्र उसमें बैठने से कतरा रहे हैं। इन डुबल डेस्क में जो सही भी है वह इस स्थिति में नहीं हैं कि एक माह से ज्यादा चल सकें।
45 में से 15 किसी काम की नहीं
आरजीपीव्ही द्वारा कुल 45 नग डुबल डेस्क इंजीनियरिंग कालेज के लिए भेजी गई थी। जिनमें से 15 नग डेस्क की स्थिति ऐसी है कि वह कबाड़ की तरह एक किनारे पड़ी हुई है। शेष 30 में से 10-15 ही सही सलामत है शेष कहीं न कहीं से क्षतिग्रस्त हैं या फिर जंग लगी हुई है। इन डुबल डेस्क को देखकर यही कहा जा सकता है कि भले ही इन्हे पैक करके भेजा गया हो लेकिन यह पहले से उपयोग में लाई जा रही थी।
कराना पड़ेगा मरम्मत
आरजीपीव्ही ने भले ही सभी डुबल डेस्क सर्टीफाइड व बकायदे पैकिंग कराकर डुबल डेस्क भेजी हो लेकिन यहां आने के बाद उनकी स्थिति बिलकुल द्वयं दर्जे की हो गई है। बिना मरम्मत कराए यह डेस्क किसी भी हालत में छात्रों के बैठने लायक नहीं है। वहीं इंजीनियरिंग कालेज प्रबंधन के सामने एक सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि उनके पास छात्रों को बैठाने के लिए तो जगह नहीं है फिर कबाड़ में तब्दील इन डेस्कों को वह कहां रखे। जिसे देखते हुए प्रबंधन अब इनके मरम्मतीकरण की तैयारी में जुट गया है।
इनका कहना है
डुबल डेस्क भेजे गए थे जिसकी रिसीविंग में ही हमने वस्तुस्थिति स्पष्ट कर दी थी। इसके बाद फिर से पत्राचार कर इनके मरम्मतीकरण की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने पर क्षतिग्रस्त डेस्कों का मरम्मतीकरण कराया जाएगा।
एन के मोदी, प्रभारी प्राचार्य इंजीनियरिंग कालेज शहडोल