जिसकी जांच लोकायुक्त ने कलेक्टर शहडोल अशोक भार्गव को दी थी। जांच में हेरफेर होने पर न्यायालय ने तत्कालीन कलेक्टर डॉ अशोक कुमार भार्गव सहित तत्कालीन एसडीएम, रिटायर्ड तहसीलदार, पटवारी, सहित डीपीसी मदन त्रिपाठी, भाई डॉ. राजेश त्रिपाठी, बीआरसी बुढ़ार महेन्द्र त्रिपाठी, पत्नि विद्या पर मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।