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इस शिवमंदिर में पांडवों ने गुजारा था अज्ञातवाश, खजुराहो की मिलती हैं कलाकृतियां

- महाशिवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का हुजूम, दूर-दराज से आते हैं लोग  

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शहडोल संभाग के सोहागपुर में स्थित विराट मंदिर धार्मिक एवं पौराणिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। दूरदराज से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। एक हजार वर्ष पुराना यह विराट मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। ऐसी जन श्रुति है कि महाभारत काल में वनवास के दौरान पाण्डवों ने यहां अपना अज्ञातवास व्यतीत किया था। विराट मंदिर के स्थापना काल के बारे में यह मान्यता है कि इसका निर्माण कार्य भी कलचुरी काल में हुआ। यह मंदिर नागरिक आस्थाओं का केन्द्र है। हजारों साल पुराना यह मंदिर अब तिरछा भी हो गया है। हालांकि केन्द्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा काफी वर्षों से संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। खजुराहो के मंदिरों के भांति यहां भी मंदिर के पत्थरों पर आकर्षक कला कृतियां निर्मित हैं। महाभारत ग्रंथ में पाण्डवों के अज्ञातवास के दौरान जिस विराट नगर का वर्णन है वह शहडोल जिला मुख्यालय ही है। इसके सम्राट राजा विराट थे। इसकी पुष्टि यहां पाये जाने वाले शमी के वृक्ष से होती है। इस प्रजाति के वृक्षों में ही अर्जुन अपना गाण्डिव धनुष रखते थे। इसी तरह बाणगंगा मंदिर में पाताल तोड़ अर्जुन कुण्ड स्थित है। चंदेल एवं परमार कालीन कई मंदिर हैं जो जिले की साहित्यिक संपदा को समृद्ध बनाती हैं।