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राजश्री ने आटा चक्की चलाकर बच्चों को दिलाई बैंक में नौकरी

मदर्स-डे पर विशेष- मां है तो मुमकिन है : संघर्ष से संवारा बच्चों का जीवन

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Rajshree donated a flour mill to give children jobs in bank

Rajshree donated a flour mill to give children jobs in bank

शहडोल. एक मां ही है जो अपनी औलाद पर कोई मुश्किल आने ही नहीं देती। फिर चाहे मुश्किलों की राह में उसे खुद ही क्यों न चलना पड़े। बच्चों का दर्द अपने आंचल में समेट बच्चों के लिए कितना कुछ करती है मां। अपनी आंख के तारों के लिए दुख तकलीफों को सहन कर उनको आगे बढ़ाती है मां...मां जो शब्द तो छोटा है पर संसार इस एक शब्द पर टिका है। कुछ चंद शब्द इनकी ममता को बयां नहीं कर सकते पर इनकी ममता की मिसाल युगों-युगों तक समाज की सोच पर सकारात्मक छाप डालती रहेगी। इस मदर्स-डे पर हम उन मां की बात कर रहे हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को न सिर्फ जन्म दिया, बल्कि उनको अपनी ममता की छांव देकर सभी दुख तकलीफों से दूर किया। समाज ने भले ही उनसे कई सवाल किए हो पर उनकी ममता ने कभी हार नहीं मानी। मातृ दिवस पर हम ऐसी ही माताओं को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने खुद अकेले दम पर अपने बच्चों की जिंदगी संवारी। कांटों भरी राह पर खुद चलीं, लेकिन बच्चों को इसका एहसास तक नहीं होने दिया। आइए रूबरू कराते है कुछ ऐसी ही माताओं से जो बिना पति के भी बच्चों को अकेले संभाल रही हैं।
आटा चक्की चलाकर बच्चों की कराई पढ़ाई
कुदरी रोड क्रांति चौंक के पास निवासी 54 वर्षीय राजश्री अहिरवार ने पति के गुजर जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई को जारी रखा। पति के इलाज में काफी पैसा खर्च हो गया था। जिससे उनके समक्ष आर्थिक समस्या थी, पर उन्होने हिम्मत नहीं हारी और आटा चक्की चलाकर बड़ी बेटी अर्चना अहिरवार को फार्मासिस्ट का कोर्स कराया और मझली बेटी आराधना, छोटी बेटी रागनी और बेटे रोहित को एमबीए कराया। उन्होने दो बेटियों ब्याह भी किया। वर्तमान में उनकी बेटी अर्चना सिंगरौली कोल माइंस के अस्पताल में फार्मासिस्ट है, मझली बेटी आराधना स्टेट बैंक जबलपुर में डिप्टी मैनेजर और छोटी बेटी रागनी बैंक ऑफ इंडिया अनूपपुर में असिस्टेन्ट मैनेजर हैं। बेटा रोहित का पिछले वर्ष एसबीआई में क्लर्क पद नियुक्ति हुई है।