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एमपी के इस शहर में लोग बाहर से आए, छोटा कारोबार जमाया और अब महीने में कमा रहे पांच लाख तक

बदला व्यापार का ट्रेंड, अब छोटे कारोबार से मोटी कमाई

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एमपी के इस शहर में लोग बाहर से आए, छोटा कारोबार जमाया और अब महीने में कमा रहे पांच लाख तक

शहडोल. पकौड़ा भी रोजगार है इसको लेकर देशभर में हल्ला मचा था। बहस छिड़ गई थी कि आखिर देश का प्रधानमंत्री क्यों इस तरह का बयान दे रहा है। लेकिन मध्यप्रदेश के इस शहर में हमने एक पड़ताल कराई तो पाया कि यहां दूसरे प्रदेशों आए लोगों ने इसी तरह के छोटे-छोटे कारोबार शुरू किए, अब वे पांच लाख रुपए महीना तक कमा रहे हैं। हर रोज का कारोबार 20 हजार रुपए तक पहुंचता है। कई ने तो यहां पर अपनी बड़ी प्रॉपर्टी खड़ी कर ली है।
विकास के पैमाने में भले ही शहडोल थोड़ा पिछड़ा हो लेकिन व्यापार के मामले में काफी आगे है। छोटे रोजगार से लेकर बड़े कारोबार को समेटा हुआ है। छोटे से शहर में छोटा कारोबार लोगों को मोटी कमाई करा रहा है। कोई पश्चिम बंगाल से आकर घर और ऑफिसों में चाय की डिलेवरी कर रहा है तो कहीं सड़कों के फुटपाथ पर स्ट्रीट फूड लोगों का पसंदीदा बना हुआ है। इन छोटे कारोबार से व्यापारियों की अच्छी खासी आमदनी भी हो रही है। स्थिति यह है कि छोटे से शहर शहडोल में मप्र से सटे प्रदेश और अन्य प्रांतों से लेकर एक सैकड़ा से ज्यादा लोग आकर रोजगार कर रहे हैं। इन रोजगार से बेहतर आमदनी भी हो रही है। कई व्यापारी तो यहां पर रोजगार जमाने के बाद बस गए हैं और कई व्यापारी तो पांच से दस साल से ज्यादा समय से यहां व्यापार कर रहे हैं। शहर के सीए सुशील सिंघल की मानें तो शहर के लोग रोजगार से न जुडऩे की वजह से अन्य प्रांत के लोग आकर रोजगार जमा रहे हैं। छोटे रोजगारों की वजह से हर साल 3 करोड़ शहर का राजस्व दूसरे प्रांतों में चला जाता है।

झांसी से आकर शहडोल में फुल्की ठेला
शहर में झांसी उरई से कई परिवार आकर फुल्की चाट का व्यवसाय कर रहे हैं। मनीष फुल्की सेंटर के मनीष प्रजापति का कहना है कि पिता के साथ आए थे। पहले एक ठेला था, अब दो ठेला हो गए हैं और खुद की दुकान भी ले
ली है।
बंगाल से आकर घर आफिस पहुंचाते हैं चाय
पश्चिम बंगाल से शहडोल अपने साथियों के साथ आकर तारकनाथ घर घर लेमन टी आफिस और घर पहुंचाते हैं। लेमन टी लोगों की पसंद बनी हुई है। तारकनाथ अपने तीन साथियों के साथ अलग अलग जगहों में फेरी लगाते हैं। हर दिन लगभग एक हजार कप की बिक्री करते हैं।

छोले-भटूरे- जीरा राइस: हर दिन दो सौ प्लेट
बिहार के रहने वाले प्रमोद कुमार शहडोल आकर छोले भटूरे और जीरा राइस का स्ट्रीट कार्नर शुरू किया है। प्रमोद के अनुसार हर दिन डेढ़ सौ से दो सौ प्लेट की खपत होती है। दोपहर चार बजे तक प्रमोद चार से पांच हजार रुपए कमा लेते हैं। छोले भटूरे और जीरा राइस लोगों के लिए पसंदीदा बना हुआ है।

लोगों का पसंद आ रही कचौरी और इमरती
राजस्थान के अलग - अलग जगहों से शहडोल में आकर लोगों ने छोटा रोजगार शुरू किया है। प्याज कचौरी के अलावा, इमरती और जलेबी लोगों की पसंदीदा है। शहर के बीकानेर मिष्ठान के संचालक राधेश्याम के अनुसार हर दिन सौ से ज्यादा कचौरी और इमरती की बिक्री
होती है।

राजस्थान का समूह: काजू व बादाम शेक, आइसक्रीम
शहर में पांच माह के लिए पिछले दस साल से राजस्थान का समूह शहडोल आकर आइसक्रीम, काजू और बादाम शेक का काम कर रहा है। शहर में लगभग तीन से चार ठेले हैं। जहां पर हर दिन पांच से आठ हजार का कारोबार होता है। इस कारोबार में लगभग ५० लोग जुड़े हुए हैं।

साउथ का डोसा इडली: हर दिन 10 हजार का धंधा
शहर के चौपाटी में पिछले दो दशक से दक्षिण भारत से पहुंचे जीएम पंडमिया डोसा इडली का कारोबार कर रहे हैं। शहडोल में छोटे से ठेले से रोजगार शुरू किया था अब बड़े स्तर में रोजगार हो चुका है। हर दिन लगभग दस हजार का कारोबार कर लेते हैं।

ट्रेनिंग और मदद मिले तो मिले रोजगार
सीए सुशील सिंघल के अनुसार ट्रेनिंग और रोजगार से जोडऩे की दिशा में कोई प्रभावी नीति नहीं है। शहर और ग्रामीण अंचलों का अधिकांश वर्ग बदलाव भी नहीं चाहता है। कोई मजदूरी कर रहा है तो अन्य रोजगार से नहीं जुडऩा चाहता है। ट्रेनिंग और मदद के लिए विशेष कार्ययोजना बनानी चाहिए। जब ट्रेनिंग मिलेगी तो अच्छे रोजगार के आसार रहेंगे।