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लघु उद्योग दिवस विशेष: लगन और मेहनत से हासिल कर रहे मुकाम, युवाओं के साथ महिलाएं बन रही उद्यमी

योजनाओं का सहारा मिला तो खुद को बना रहे काबिल

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लघु उद्योग दिवस विशेष: लगन और मेहनत से हासिल कर रहे मुकाम, युवाओं के साथ महिलाएं बन रही उद्यमी

लघु उद्योग दिवस विशेष: लगन और मेहनत से हासिल कर रहे मुकाम, युवाओं के साथ महिलाएं बन रही उद्यमी

शहडोल. सरकार की योजनाओं व समूहों के सहयोग से जिले के युवाओं के साथ ही महिलाएं भी उद्यमी बन रही हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में नवाचार कर जहां स्वयं का रोजगार स्थापित कर रहे हैं वहीं दूसरों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं। छोटी-छोटी औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर महिलाएं स्वयं को सशक्त बना रही हंै। साथ ही अन्य महिलाओं के लिए भी आय का जरिया तैयार कर रही हंै। वहीं युवा सरकार की योजनाओं की मदद से लघु उद्योगों के साथ ही अन्य कारोबार स्थापित कर स्वावलंबी बन रहे हैं। साथ ही दूसरों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं।
स्टार्टअप इंडिया से मदद, शुरू की कंपनी
नगर के सुनील कुमार दिल्ली में बी.टेक, एमटेक, नैनो टेक्नॉलाजी व पीचएडी की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2015 में अपनी कंपनी प्रारंभ कर दी थी। स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से उन्हें फंडिंग हुई तो उन्होंने पूरा सेटअप तैयार कर लिया। आईआर्क नाम की उनकी यह कंपनी नैसकॉम व माइक्रोसाफ्ट से समर्थित है। जो दिल्ली एनसीआर, गुजरात, चेन्नई, मध्य प्रदेश व हैदराबाद में काम कर रही है। कंपनी डाइबिटीज, हार्टअटैक, किडनी फेल्योर, कैंसर जैसी बीमारियों के मरीजों के भविष्य की जोखिम की पहचानने में मदद करती है। इससे रोगी जोखित की पहचान कर सकता है। जिसमें मरीजों की बीमारियों के अगले स्टेप की पड़ताल कर डॉक्टरों की मदद से समुचित इलाज व कम दाम पर दवा उपलब्ध कराना व मरीजों की मॉनीटरिंग की दिशा में विशेष कार्य कर रहे हैं। सुनील कुमार की इस कंपनी में दिनाकरण, डॉ उत्कर्ष जैन व डॉ निधि चौहान पूरा सहयोग कर रहे हैं। जिससे मरीजों को समुचित लाभ मिले।
लोन लेकर शुरू किया मसाले का काम
बेम्हौरी निवासी ज्योति वर्मन 2019 के पहले एक गृहिणी थी जो कि बच्चों की शिक्षा के साथ ही घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अपनी जरूरतों को भी नजर अंदाज कर देती थी। वर्ष 2019 में वह समूह से जुड़ी और अलग-अलग प्रशिक्षण प्राप्त किया और हल्दी के लघु उद्योग से जुड़कर स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने में जुट गई। ज्योति ने उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 25 हजार का लोन लिया। जिससे उसने साबूत हल्दी से मसाला बनाने की मशीन खरीद कर उसकी मदद से हल्दी पाउडर व अन्य मसाले तैयार कर पैकेट बनाकर आस-पास की दुकानों व संकुल स्तरीय संगठन, ग्राम संगठन और समूह की बैठकों में बेंचने लगी। ज्योति के इस काम में उसके पति ने भी सहयोग करना प्रारंभ कर दिया। जिससे होने वाली आय से उसने जहां अपना घर तैयार किया वहीं बच्चों को भी अच्छी शिक्षा दिलाने में सफल हुई है। ज्योति अपने इस कारोबार से हर माह 20-25 हजार रुपए की आय अर्जित कर रही हैं।
अब स्वयं कर सकेंगे हल्दी की प्रोसेसिंग
जनपद पंचायत गोहपारू अंतर्गत सरिहट निवासी टीकाराम कुशवाहा लगभग 3 एकड़ भूमि पर हल्दी की खेती करते थे। इसके बाद भी उन्हें इससे उतना फायदा नहीं मिल पाता था। हल्दी उबालना व उसकी प्रोसेसिंग करने में बहुत समय लगता था। जितनी ज्यादा हल्दी होती थी उतनी प्रोसेसिंग नहीं हो पाती थी। जिससे टीकाराम को काफी नुकसान होता था। उन्होने छोटे स्तर पर आधुनिक तरीके से हल्दी की प्रोसेसिंग का काम शुरु किया। जिससे उन्हें काफी मदद मिलने लगी। अब वह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना से 15 लाख 38 हजार रुपए का लोन स्वीकृत कराया है। जिसकी मदद से अब वह पूरा सेटअप तैयार कर रहे हैं। आधुनिक तरीके से हल्दी की प्रोसेसिंग करेंगे तो समय पर उनकी पूरी हल्दी की प्रोसेसिंग हो जाएगी। साथ ही वह दूसरों की हल्दी की भी प्रोसेसिंग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। हल्दी की प्रोसेसिंग कर उसका पाउडर तैयार कर वह आसानी से उसे बाजार में उपलब्ध करा सकेंगे।