
शहडोल- एक लाख से भी कम आबादी का शहर है शहडोल, लेकिन यातायात की समस्या बड़े महानगरों जैसी। शहर में बेलगाम दौड़ रहे ऑटो नागरिकों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। इनका रेट, रूट, स्टैंड कुछ भी तय नहीं है। ये भी तय नहीं है कि ये कितनी सवारियां बैठाएंगे। ऑटो चालकों के बेलगाम होने की वजह है कि प्रशासन, यातायात विभाग और यातायात पुलिस को ये व्यवस्था सुधारने की परवाह ही नहीं है। इसी के चलते शहर का पब्लिक ट्रैफिक पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।
पटरी से उतरी ट्रैफिक व्यवस्था से नागरिकों के मुसीबत का सबब बन रही है। शहर में चल रहे वाहन जहां मर्जी होती है जाते हैं, जहां मर्जी होती है खड़े होते हैं और सबसे ज्यादा दिक्कत वाली बात ये है कि यात्री भी मनमाने बैठाते हैं और किराया भी मनमर्जी से ही वसूलते हैं। इनके लिए कोई भी कायदे कानून तय नहीं किए गए हैं।
ऑटो चालकों, सवारियों में होता है विवाद शहर के ऑटो इन दिनों लोगों के लिए आफत बन गए हैं। रेट का निर्धारण न होने से कोई ऑटो चालक और सवारियों के बीच विवाद की स्थिती बनती है। किस रोड पर कौन सा ऑटो चलेगा यह भी निर्धारित नहीं हैं। पहले 1 से 5 किमी तक 20 रुपए वसूलने का आवेदन जिला प्रशासन को सौंपा गया था, जो लागू नहीं हुआ। अब असमंजस की स्थिति बन गई है। कुछ ऑटो चालक 10 रुपए लेते हैं तो कुछ 20 रुपए। यूनियन द्वारा कहा गया कि ग्रामीण अंचलों के ऑटो चालक रेट बिगाड़ते हैं, जिस कारण सवारियों से विवाद हो रहा है।
बदहाल व्यवस्था
- शहर में दौड़ रहे 2 हजार ऑटो
- आए दिन होता है विवाद, यात्रियों से अभद्रता
- तेज गति और बेढंग तरीके से चल रहे ऑटो
- रेट, रुट तय नहीं, क्राइम का अंदेशा
- यातायात और आरटीओ नहीं करता कार्रवाई
- नहीं हैं ऑटो स्टैंड बीच सड़क पर रोक दिए जाते हैं वाहन
- दुर्घटनाओं का बना हुआ है अंदेशा
- 25 प्रतिशत बिना परमिट और ओवरलोड दौड़ रहे ऑटो
- आम लोगों को हो रहीं परेशानियां
- 4 साल से निर्धारित नहीं कर पाए रेट लिस्ट
- 1 दर्जन प्रमुख सड़कों पर दौड़ते हैं ऑटो
बीच सड़क पर धमाचौकड़ी मचा रहे ऑटो
संभागीय मुख्यालय में धमाचौकड़ी मचाने वाले करीब 1 हजार ऑटो के लिए शहर में स्टैंड नहीं हैं। जिला प्रशासन द्वारा शहर में गांधी चौक, बुढ़ार चौक, महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल के पास, जय स्तंभ, बायपास, बस स्टैंड सहित ७ जगहों पर ऑटो स्टैंड बनाने का कार्य किया जाना था, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी ऑटो स्टैंड नहीं बनाया गया। अब हालात यह हैं कि ऑटो चालक सवारियां देखते ही बीच सड़क पर वाहन रोक देते हैं, इससे अन्य राहगीरों को परेशानियां तो हो ही रहीं हैं, इसके अलावा दुर्घटनाएं भी होती हैं।
25 प्रतिशत चालकों के पास नहीं परमिट
आरटीओ की लापरवाही से एक-एक वर्ष बीत जाने के बाद भी ऑटो चालकों के परमिट भी नहीं बने हैं। हालात यह हैं कि 25 प्रतिशत ऑटो चालकों के पास परमिट ही नहीं है। अनेकों ऑटो चालक एक-एक वर्ष से आरटीओ विभाग के चक्कर काट रहे हैं। महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें परमिट नहीं दिए जा रहे हैं। शहर के 1 हजार व 20 किमी आसपास के करीब 2 हजार ऑटो शहर में दौड़ रहे हैं। इनमे से 900
चालकों के पास ही परमिट हैं।
जल्द करेंगे व्यवस्था
कलेक्टर नरेश पाल के मुताबिक शहर में ट्रेफिक व्यवस्था को लेकर यातायात समिति की बैठक हुई थी। उसमें भी ये मामला उठाया गया था। जिसमें यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए निर्णय हुए थे। ऑटो के रेट, रूट तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। मामले में जल्द ही नियमों का पालन कराया जाएगा।
मेरी नहीं यातायात पुलिस की जिम्मेदारी
आरटीओ एलआर सोनवानी के मुताबिक ट्रैफिक व्यवस्था की जिम्मेदारी मेरी नहीं है, ये यातायात पुलिस का मामला है। कार्रवाई के लिए हमारे पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है, संभागीय मुख्यालय में फ्लाइंग स्क्वाड होती हैं, लेकिन शहडोल में ऐसा नहीं है।
आरटीओ विभाग बरत रहा लापरवाही
ऑटो यूनियन के चैयरमैन हरिमोहन साहू ने कहा हमने तो सालों पहले रेट लिस्ट जिला प्रशासन को स्वीकृति के लिए भेजी थी, लेकिन प्रशासन ध्यान ही नहीं दे रहा है। कुछ ऑटो चालक लापरवाही से वाहन चलाते हैं, आरटीओ विभाग परमिट देने में वर्षों लगा देता है। स्थानीय के अलावा बाहरी लोग भी शहर में ऑटो चला रहे हैं। पॉपुलेशन से ज्यादा ऑटो हो चुके हैं।
Published on:
19 Jan 2018 12:27 pm

बड़ी खबरें
View Allशहडोल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
