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आक्रोशित किसानों ने कलेक्ट्रेट गेट पर जड़ा ताला

किया प्रदर्शन, इसके बाद क्या हुआ जानने के लिए पढि़ए पूरी खबर...

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the angry farmers locked on the collectorate gate

the angry farmers locked on the collectorate gate

शहडोल. किसानों ने शुक्रवार को सुबह १०:30 बजे कलेक्ट्रेट गेट पर ताला जड़ दिया। किसान पिछले दो दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। किसानों ने कई दिन पहले ही कलेक्ट्रेट में ही तालाबंदी की घोषणा कर दी थी। किसानों ने अपनी घोषणा के अनुसार शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार और कलेक्ट्रट के अन्दर दोनों चैनल गेट पर ताला जड़ दिया।

सुबह लगभग 9 बजे से किसानों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया और यह क्रम दोपहर लगभग 3 बजे तक चला। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास दिनभर गहमा गहमी का माहौल बना रहा।

आक्रोशित किसानों ने प्रशासन और सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और आन्दोलन के कारण कलेक्ट्रेट का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित रहा। कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर सैकड़ों किसानों ने धरना देकर बैनर से मुख्य द्वार को बंद किए रखा, जिससे कलेक्ट्रेट के कर्मचारी अन्दर नहीं जा सके। कर्मचारी किसी तरह पीछे के दरवाजे से अंदर गए। इस बीच लगभग १२.३० बजे के बाद एडीएम सरोधन सिंह किसानों को समझाइस देने और मनाने पहुंचे। किसानों ने उनकी नहीं सुनी।

लगभग 1 बजे प्रभारी कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य और एसपी सुशांत सक्सेना किसानों के पास गए। उन्हे समझाने और मनाने का प्रयास किया, लेकिन किसान इस बात को लेकर अड़े रहे कि जब तक प्रशासन लिखित में आश्वासन नहीं देगा वे आंदोलन स्थगित नहीं करेंगे। किसानों ने जब आत्मदाह की धमकी दी तब प्रशासन जागा। आनन-फानन में कलेक्टर ने भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को कांन्फेंसिंग के दौरान मामले की जानकारी दी और वहां से हरी झंडी मिलने के बाद कलेक्टर दुबारा किसानों से चर्चा करने पहुंचे और उन्हे २३ दिसंबर तक मांग पूरी करने के लिए आश्वासन दिया। इसके बाद किसानोंं ने कलेक्ट्रेट के गेट का ताला खोला। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वज्र वाहन आंसू गैस के साथ बम निरोधक दस्ता की तैनाती की गई थी। आन्दोलन के दौरान भारतीय किसान संघ के जिलाअध्यक्ष और पूर्व कृषि वैज्ञानिक भानूप्रताप सिंह, होरीलाल, जायसवाल, अरुण तिवारी, ओंकार सिंह, लल्लू सिंह तोमर, सुशील द्विवेदी, रामपाल चतुर्वेदी आदि मौजूद थे।

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