लगभग 1 बजे प्रभारी कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य और एसपी सुशांत सक्सेना किसानों के पास गए। उन्हे समझाने और मनाने का प्रयास किया, लेकिन किसान इस बात को लेकर अड़े रहे कि जब तक प्रशासन लिखित में आश्वासन नहीं देगा वे आंदोलन स्थगित नहीं करेंगे। किसानों ने जब आत्मदाह की धमकी दी तब प्रशासन जागा। आनन-फानन में कलेक्टर ने भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को कांन्फेंसिंग के दौरान मामले की जानकारी दी और वहां से हरी झंडी मिलने के बाद कलेक्टर दुबारा किसानों से चर्चा करने पहुंचे और उन्हे २३ दिसंबर तक मांग पूरी करने के लिए आश्वासन दिया। इसके बाद किसानोंं ने कलेक्ट्रेट के गेट का ताला खोला। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वज्र वाहन आंसू गैस के साथ बम निरोधक दस्ता की तैनाती की गई थी। आन्दोलन के दौरान भारतीय किसान संघ के जिलाअध्यक्ष और पूर्व कृषि वैज्ञानिक भानूप्रताप सिंह, होरीलाल, जायसवाल, अरुण तिवारी, ओंकार सिंह, लल्लू सिंह तोमर, सुशील द्विवेदी, रामपाल चतुर्वेदी आदि मौजूद थे।