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महानगरों की तर्ज पर शहर में बिक रहा धीमी मौत का जहर, जबलपुर – इलाहाबाद से पहुंच रहीं खेप

युवा हो रहे स्मैक के लत का शिकार

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 The poison of slow death, sold in the city on the lines of metropolitan cities, Jabalpur - Coming from Allahabad

महानगरों की तर्ज पर शहर में बिक रहा धीमी मौत का जहर, जबलपुर - इलाहाबाद से पहुंच रहीं खेप

महानगरों की तर्ज पर शहर में बिक रहा धीमी मौत का जहर, जबलपुर - इलाहाबाद से पहुंच रहीं खेप


शहडोल. वर्तमान में शहर और संभागीय मुख्यालय के सीमावर्ती गावों मे नशे का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। जिसका सेवन कर युवा बर्बाद हो रहे है। शहर में पूना,जबलपुर और इलाहाबाद से स्मैक पहुंच रही है। जिसकी पान दुकान और किराना दुकानों तक से सप्लाई हो रही है। गली-गली में बिक रहे इस धीमे जहर से सैकड़ों युवा लत के शिकार हो चुके है। जिसकी जानकारी पुलिस को भी है। लेकिन वह चुप्पी साधे हुए है। जिससे जहां युवाओं का भविष्य अंधकार मय हो रहा है वही स्मैक तस्करो के हौसले बढ़े हुए है।
अब तक जिले में बेखौफ गांजा बिकता था। जो हर गली चौराहे में आसानी से लोगों को उपलबध हो जाता था। लेकिन अब गांजे के साथ-साथ स्मैक भी खुले आम बिकने लगा है। जिसके लत के शिकार इन दिनो सैकड़ो युवा हो चुके है। जिनकी दिमाकी हालत पर भी असर पड़ रहा है।
पिछले महीनों में पुलिस की सक्रियता से इस नशे के कारोबार में लगाम लगी थी। जिसमे कई स्मैक बेचने के आरोपी जेल तक चले गए थे। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर के स्मैक का कारोबार करने वालो पर भी डर बना था। लेकिन वर्तमान में पुलिस नशे के कारोबार पर नजर कमजोर कर ली है। जिसके चलते आधा दर्जन से अधिक स्मैक बिकने के ठीहे शहर में ही संचालित हो रहे है। जहां पर 24 घंटे धीमा जहर स्मैक युवाओं को परोसा जा रहा है। इन छोटे स्मैक के तस्करो की दुकाने रात को भी खुली रहती है। जहां से कोई भी युवा आसानी से स्मैक खरीद सकता है।
सूत्रों की माने तो नशे का यह कारोबार संभागीय मुख्यालय तक सीमित नहीं है। इसकी जड़े ग्रामीण क्षेत्रों मेंभी गहरी होती जा रही है। संभागीय मुख्यालय के एक दर्जन समीपी गावों में स्मैक के आदी युवक मिल जाएंगे। जिनके परिवार चिंतित है। इसके बाद भी पुलिस इस धीमे जहर की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कदम नहीं उठा रही है।
एरियर्स में 40 हजार रुपये कटौती करने के फैसले को प्रबंधन ने लिया वापस
10वें वेतन समझौता के बकाया एरियर्स भुगतान 22 अगस्त तक देने का आदेश कोल इण्डिया द्वारा जारी किया था। इस एरियर्स में एसईसीएल में पोस्ट रिटायरमेंट मेडिकल स्कीम के तहत् रुपये 40,000 की एकमश्त कटौती की जा रही थी। जिसके कारण सभी कर्मचारियों का एरियर्स माइनस आ रहा था। इस कटौती के विरोध में संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक), एसईसीएल के केन्द्रीय महामंत्री का हरिद्वार सिंह ने 15 अगस्त 2018 को निदशक कार्मिक बिलासपुर को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज की और कटौती रोकने का मांग किया। इस संबंध में संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में धरना प्रदर्शन कर विरोध भी दर्ज किया गया। इसके परिणास्वरुप महाप्रबंधक बिलासपुर ने कोल इण्डिया से निर्देश प्राप्त होने के बाद पत्र यह निर्देश दिया गया है कि उक्त एरियर्स में से रुपये 40,000 की एकमश्त कटौती नहीं की जाएगी। बिना कटौती के एरियर्स जल्द ही कर्मचारियों को भुगतान किया जाएगा। यह एटक के प्रयास से यह कोयला मजदूरों की सबसे जीत है। दिल्ली में 21अगस्त को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है । कि केरल बाढ़ पीडि़तों के लिए कोल इण्डिया सी0एस0आर0 फण्ड से 25 करोड़ रुपये भेजेगी। यह भी तय किया गया है कि फरवरी 2018 से ठेका श्रमिकों को 5 लाख रुपये एक्सग्रेसिया पेमेंट किया जायेगा।