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न्यायालय में आयोजित हुआ कार्यक्रम, संविधान की उद्देशिका का कराया गया वाचन

संविधान देश की सर्वोच्च विधि : न्यायाधीश सभापति यादव

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 The program organized in the court, the readings of the constitution's objectives

न्यायालय में आयोजित हुआ कार्यक्रम, संविधान की उद्देशिका का कराया गया वाचन

शहडोल . जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आरके सिंह के मार्गदर्शन में सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरणद द्वारा एडीआर सेन्टर के सभागार में राष्ट्रीय विधि एवं संविधान दिवस का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विशेष न्यायाधीश सभापति यादव ने कहा कि आज हम सब यहां विधि दिवस और संविधान दिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं । हम सब यह जानते हैं कि भारत का संविधान जो कि देश की सर्वोच्च विधि है किसी क्रान्तिकारी परिणाम नहीं था बल्कि आजादी के बाद संविधान सभा द्वारा बनाया गया, एक दस्तावेज है जिससे यह निर्धारित हुआ कि देश का शासन किस प्रकार चलेगा ।
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विशेष न्यायाधीश सभापति यादव ने कहा कि आज हम सब यहां विधि दिवस और संविधान दिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं । हम सब यह जानते हैं कि भारत का संविधान जो कि देश की सर्वोच्च विधि है किसी क्रान्तिकारी परिणाम नहीं था बल्कि आजादी के बाद संविधान सभा द्वारा बनाया गया, एक दस्तावेज है जिससे यह निर्धारित हुआ कि देश का शासन किस प्रकार चलेगा । उन्होनें कहा कि हम संविधान बनाये जाने की पृष्ठभूमि पर दृष्टिपात करें तो हम पाते हैं कि 1600 ई में अंग्रेज व्यापारी एक व्यापारिक कंपनी के रूप में भारत आते हैं और कालान्तर में हमें ही अपना गुलाम बना लेते हैं । 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से लेकर 1858 के चार्टर लागू रहने तक हम कंपनी द्वारा शासित हुए । 1857 के विद्रोह ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया और 1858 के चार्टर द्वारा कंपनी के शासन को समाप्त कर भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन द्वारा होने लगा । 1946 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी जो भारतीयों के प्रति थोड़ा सा सहानुभूति रखती थी अत: 4 मार्च 1946 को उसने तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन भारत भेजा । कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों को, जिसमें भारत के लिए संविधान निर्माण करने के लिए संविधान सभा का चुनाव करना था को स्वीकार करते हुए भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पास किया गया । 9 नवम्बर 1946 को संविधान सभा अपने अस्तित्व में आई जिसमें एसएन सिन्हा इसके अध्यक्ष चुने गये और 11 नवम्बर 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को इसका स्थाई सदस्य बना दिया गया। 2 वर्ष 11 माह 18 दिन की लंबी चर्चा के बाद 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान भारत के लोगों द्वारा अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मसमर्पित किया गया । इसी दिन की याद में हम सब यह राष्ट्रीय विधि दिवस मना रहे हैं । वर्ष 2015 में केन्द्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन कर 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया जिससे आज का दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है । भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्णत: लागू किया गया। आज भारत के संविधान को लागू हुए 68 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। अत: आज का दिन एक अच्छा अवसर प्रदान करता है कि हम देखे कि भारतीय संविधान के लागू होने के 68 वर्षों बाद हमारी क्या उपलब्धियां रही और क्या अपेक्षाएं अभी शेष हैं ? भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान द्वारा प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्यों को बताती है । प्रस्तावना में उल्लेख है कि ''हम भारत के लोग भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथ निर्पेक्ष लोक तंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की संता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ईसवी को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मसमर्पित करते हैं ।
उद्देशिका में वर्णित प्रथम उद्देश्य समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय दिलाना है । न्याय प्राप्ति की दिशा में 68 वर्षों में बहुत बड़ा बदलाव आया है । माननीय सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा अनुच्छेद 14 में वर्णित विधि के समक्ष समता और अनुच्छेद 21 में वर्णित जीवन के अधिकार को बड़ा विस्तृत आयाम दिया । माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यैक्तिक स्वतंत्रता की इस प्रकार से व्याख्या की कि जीवन जीने और जीवन में प्रगति करने का हर एक अवसर उसमें समाहित हो गया। एके गोपालन बनाम मद्रास राज्य (एआईआर 1950 एससी 27) में सर्वोच्च न्यायालय ने जीवन के अधिकार के अंतर्गत व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बड़े संकीर्ण नजरिये से देखा और कहा कि किसी भी संविधि द्वारा यदि कोई प्रक्रिया वर्णित की जाती है तो वह प्रक्रिया अपनाकर जीवन के अधिकार को भी समाप्त किया जा सकता है । लेकिन दो दशक बाद जस्टिस कृष्णा अययर ने आरसी कूपर बनाम भारत संघ में कहा कि प्रक्रिया का मतलब निष्पक्ष प्रक्रिया से है जिसे बाद में मेनका गांधी बनाम भारत संघ के केस में कहा गया कि कोई भी प्रक्रिया जो कि जीवन के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छीनती है, वह तब तक संवैधानिक नहीं होगी, जब तक कि उचित निष्पक्ष एवं युक्तियुक्त (जस्ट फेयर एण्ड रीजनेबल) न हो । भारत में प्रजातंत्र के तीन आधार है विधायिका का काम है संविधान में दी गई सीमा के अंतर्गत लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए कानून बनाना । कार्यपालिका का कार्य है उन कानूनों का पालन करना और समाज में विधि व्यवस्था बनाए रखना किन्तु समाज में न्याय व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी न्यायपालिका पर आती है जो यह निर्धारित करती है कि विधायिका द्वारा बनाए गए कानून संवैधानिक है अथवा नहीं और कार्यपालिका द्वारा संवैधानिक कानूनों का पालन सही तरीके से हो रहा है कि नहीं ?
मूलभूत अधिकारों की व्याख्या में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत हर एक पहलू को सम्मिलित किया जिसमें विदेश जाने का अधिकार, निजता का अधिकार, चिकित्सीय सहायता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, गरिमामय जीवन जीने का अधिकार इत्यादि । अनुच्छेद 39ए जो कि राज्य को एक निर्देश प्रदान करता है कि राज्य विधिक व्यवस्था को उचित विधायन या योजना द्वारा इस तरह से लागू करेगा कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक या किसी अन्य निर्योग्यता के कारण न्याय पाने से वंचित न रहे । इसी अनुच्छेद के अंतर्गत विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 बना जिसके अंतर्गत जिला स्तर से लेकर राष्टीय स्तर तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों का गठन किया गया जिनका मूल उद्देश्य समाज में सबको न्याय प्राप्त हो इसके लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से न्याय प्राप्त करने में विधिक सेवा दिलाना है । पूर्व में समाज में घटित अपराध से पीडि़त व्यक्ति के पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं थी आरोपी पर सरकार द्वारा अभियोजन चलाया जाता था और उसे दण्डित किया जाता था । अपराध पीडि़त प्रतिकर योजना के माध्यम से पीडि़त पक्ष को भी पुनर्वास एवं आर्थिक राशि प्रदान कर उसके साथ न्याय किया जाता है ।
आज दिनांक तक भारतीय संविधान में 102 संविधान संशोधन हो चुके हैं । इन संविधान संशोधनों का उद्देश्य राज्य को एक कल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित करना है । यदि हम स्वतंत्रता प्राप्ति से अब तक के समय पर दृष्टिपात करें तो हम पाते हैं । कि हमने न्याय प्राप्ति की दिशा में अच्छी प्रगति की है । आर्थिक क्षेत्र में भी हमने अच्छी प्रगति की है । आज भारतीय सेना विश्व की तीसरी बड़ी एवं शक्तिशाली सेना के रूप में जानी जाती है । खाद्यन उत्पादन के क्षेत्र में भी हमने प्रगति की है, चिकित्सा के क्षेत्र में पोलियो जैसी गंभीर बीमारियों से भारत मुक्त हो चुका है और सामान्य व्यक्ति तक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध हैं । इस प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में हमने प्रगति की है किन्तु अभी बहुत कुछ पाना शेष है । आज भी हमारे यहां जब लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होते हैं तो लोगों को वोट डालने के लिए जागरूक करना पड़ता है । समय-समय पर होने वाले साम्प्रदायिक दंगे जातिगत उन्माद अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी आज भी समाज में व्याप्त है जो यह याद दिलाता है कि संविधान की उद्देशिका में वर्णित उद्देश्यों को प्राप्त करने में अभी हम पूर्णत: सफल नहीं हुए हैं। अत: हमें क्षमता के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए जिससे हम स्वयं और हमारे साथ हमारा राष्ट प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सके ।
कार्यक्रम को प्रथम अति. जिला न्यायाधीश अविनाश चंद्र तिवारी ने संबोधित करते हुए कहा कि हमें जागरूक होते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा जिससे संविधान में उल्लेखित उद्देश्यों को प्राप्त कर हम सब सुखद एवं गरिमामय जीवन जी सके । कार्यक्रम के अंत में तृतीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश केके मिश्रा द्वारा उपस्थित लोगों के माध्यम से संविधान की उद्देशिका का वाचन कराया गया ।
इस कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश सभापति यादव, प्रथम अपर जिला न्यायाधीश अविनाश चंद्र तिवारी, द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश अनुज कुमार मित्तल, तृतीय अपर जिला न्यायाधीश केके मिश्रा, प्रशिक्षु अति. जिला न्यायाधीश शरद कुमार गुप्त, व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-1 विवेक कुमार सिंह, व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 रेनु खान, प्रशिक्षु न्यायाधीश उदयाजीत राव, प्रशिक्षु न्यायाधीश विजया भारती यादव, जिला विधिक सहायता अधिकारी बीडी दीक्षित, जिला लोक अभियोजन अधिकारी विश्वजीत पटेल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सम्बद्ध पैनल लायर्स एवं पैरालीगल वालेंटियर्स तथा सामान्य जन उपस्थित रहे ।