
The railway station becomes nightly after night at night
शहडोल. संभागीय मुख्यालय का रेलवे स्टेशन रात्रिकाल में रैन बसेरा बन जाता है, क्योंकि स्टेशन में इन दिनों रात्रिकाल में यात्रियों की तुलना में बाहरी लोगों का ज्यादा कब्जा रहता है। स्टेशन के आसपास कहीं कोई भोजन पकाता नजर आता है तो कहीं कोई बिस्तर लगाकर सो रहा होता है। इनमें अधिकांश लोग या तो गरीब तबके के भिखारी रहते हैं या फिर दिन में कबाड़ बीनने वाले मजदूर। जो स्टेशन को अपना घर मानकर रात्रिकाल में बसने चले आते हैं और सुबह होते ही अपने काम पर निकल जाते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी रेलयात्रा के लिए निकले यात्रियों को होती है।स्टेशन में रेलवे इंक्वायरी व टिकट खिडक़ी के सामने बाहरी लोगों के बेजा कब्जे की वजह से यात्रियों को टिकट लेने और ट्रेन के संबंध में पूंछताछ करने में काफी दिक्कतेंं होती हैं। साथ ही चहुंओर गंदगी फैली रहती है, जो स्टेशन के वातावरण को प्रदूषित करती रहती है।
असमाजिक तत्व भी रहते हैं सक्रिय
रेलवे स्टेशन में असमाजिक तत्व भी सक्रिय रहते हैं, जो बेजा कब्जाधारियों की भीड़ का फायदा उठाते रहते हैं और मौका लगते ही यात्रियों का मोबाइल या अन्य सामान को पार कर देते हैं। इसके अलावा लड़कियों व महिलाओं के साथ छींटाकशी व अभद्र व्यवहार करते रहते हैं। स्टेशन में अक्सर प्रेमियों का युगल जोड़ा भी नजर आता है। जिन्हे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि उनके लिए स्टेशन से ज्यादा सुरक्षित जगह नहीं है, क्योंकि प्रेमालाप करने में उन्हे कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती है।
आवारा पशु करते हैं स्वतंत्र विचरण
रात्रिकाल में बाहरी तत्वों के अलावा आवारा पशुओं के लिए भी रेलवे स्टेशन ज्यादा सुरक्षित महसूस होता है और वह नि:संकोच प्लेटफार्म में या तो स्वतंत्र विचरण करते नजर आते हैं या फिर यात्रियों के आजू-बाजू में सोते रहते हैं। आवारा पशुओं में सर्वाधिक संख्या कुत्तों की रहती है। जो झुण्ड बनाकर पूरे स्टेशन में घूमते रहते हैं। आश्चर्य तो तब होता है कि जब इनको नियंत्रित करने वाला जिम्मेदार अमला नदारद रहता है, मगर अधिकारियों के आगमन पर वह ज्यादा सक्रिय दिखते हैं।
प्लेटफार्म की छतों से निकलती है बारिश की धार
रेलवे स्टेशन के तीनों प्लेटफार्म में अभी छह माह पूर्व लगाई गई करोड़ों रुपयों की सीटों से बारिश के पानी की धार निकलती है और बारिश के दौरान पूरे प्लेटफार्म में बारिश का पानी भर जाता है। ऐसे में यात्रियों को प्लेटफार्म में बैठना तक मुश्किल हो जाता है। सवाल यह उठता है कि जब बारिश के पानी को प्लेटफार्म में ही फैलाना था, तो करोड़ों रुपए खर्च करके पुरानी शीट को निकालकर नई सीट क्यों लगवाई गई थी? बताया गया है कि जब भी बारिश होती है तो बाहर कम और प्लेटफार्म में ज्यादा पानी नजर आता है। जिसमें गिरकर कई लोग घायल भी हो चुके हैं।
इनका कहना है
स्टेशन में गरीब तबके के लोग रात्रिकाल में आ जाते है, इन्हे कई बार आरपीएफ के जवानों द्वारा भगाया जाता है, मगर वह नहीं मानते। प्लेटफार्म की सीटों से पानी की बहने की जानकारी रेलवे के आइओडब्लू विभाग को दी जा चुकी है। जिस पर शीघ्र ही सुधार होने की संभावना है।
केपी गुप्ता
मुख्य स्टेशन प्रबंधक, शहडोल
Published on:
01 Aug 2019 07:05 am
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