
The settlement was destroyed in ghosts
शहडोल। राष्ट्रीय मानव की ख्याती प्राप्त बैगाओं के लिए बिजौरी गांव में बनाई गई बस्ती वीरान पड़ी है। बैगा परिवारों के लिए करीब ३२ लाख से बनाए गए दो दर्जन आवास खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। भूत के भय से हितग्राही यहां रहना नहीं चाहते और चोर नव निर्मित मकानों के छप्पर, दरवाजे तक ले गए हैं। क्षेत्र में अंधविस्वास इतना हावी है कि लोगों ने अब इसे भूतिया बस्ती का नाम दे दिया है।
दरअसल वर्ष 2010-11 में बिजौरी गांव के गरीब बैगा परिवारों को बैगा विकास से आवास स्वीकृत हुए थे।
2011-12 में बिजौरी गांव के बाहर की सरकारी जमीन पर 32 लाख की लागत से 25 आवास की बस्ती बनाई गई थी। बस्ती में संरक्षित जाति के बैगा परिवारों को तमाम व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखा गया था। बस्ती के मुख्य गेट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सांस्कृतिक भवन, पेयजल के लिए हैंडपंप और व्यवस्थित आवास बनाए गए थे। इसमें किचिन से लेकर बेड रूप और अन्य कमरे भी शामिल थे।
बीमारी से हुई मौत,अंधविस्वास में छोड़ दिए घर
स्थानीय लोगों की मानें तो साल 2012 में बिजौरी के 25 हितग्राहियों को उक्त आवास दिए गए। शुरुआती दिनों में बैगा परिवार इसमें रहने आ गए थे। नए मकान में प्रवेश करने के चंद दिनों में ही एक बैगा परिवार में बीमारी के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। नए घर में मौत के बाद यहां निवासरत परिवारों में अंधविश्वास फैल गया और एक के बाद एक सभी हितग्राही मकान छोड़कर भाग गए।
छप्पर बचे न गेट, ईटों पर है चोरों की नजर
करीब 5 वर्ष पहले जब बैगा परिवारों ने बस्ती छोड़ी तो धीरे-धीरे मकानों के छप्पर और खिड़की दरवाजे गायब होने लगे। लोग खोद कर कीमती सामान ले गए। बस्ती का गेट भी चुरा लिया गया है। अब बदमाशों की नजर घर की ईंटों पर लगी हैं, किसी ने सुध नहीं ली तो धीरे-धीरे पूरी नवनिर्मित बस्ती गायब हो जाएगी। आवास के बाहर अब सिर्फ रनमत बैगा, चैतु बैगा, सम्पत बैगा, बुद्धा बैगा जैसे हितग्राहियों के नाम ही लिखे दिखाई देते हैं।
इनका कहना है
बिजौरी निवासी रामधारी यादव के मुताबिक गांव के कुछ लोगों को आवास मिले थे, लेकिन चार-पांच वर्ष पहले यहां एक व्यक्ति की मौत बीमारी के कारण हो गई थी। तभी से यहां भूत की अफवाह फैल गई। अब यहां कोई नहीं रहता।
पुराने अधिकारियों ने जगह का चयन किया था
बैगा विकास प्रशासक के प्रभारी प्रयास प्रकाश के मुताबिक पुराने अधिकारियों ने जगह का चयन किया था, अब कोई भी हितग्राही वहां नहीं रहना चाहता। इसमें जो भी कार्य कर सकते हैं, प्रयास होंगे।
Published on:
20 Dec 2017 12:43 pm
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