
Trouble on the lives of tigers in the area
शहडोल- सर्किल में एक के बाद एक वन्यजीवों के शिकार मामले ने वन विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर की है। इसके बाद भी वन विभाग के बड़े अफसरों को हाईकमान का अभयदान है। वन्यजीवों के शिकार के पीछे अफसर मैदानी अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही बताकर कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन विभाग के बड़े अधिकारियों पर लापरवाही तय नहीं कर पा रहे हैं। बाघ का मूवमेंट छिपाने के मामले में सिंहपुर फारेस्टर के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के बाद अब रेंजर शहडोल को रेंज से हटा दिया है। डीएफओ प्रदीप मिश्रा के अनुसार रेंजर जेडी खरे को बाघ मामले में लापरवाही मिलने पर अधिकारियों द्वारा शहडोल रेंज से हटाते हुए अमझोर रेंज किया है।
हालांकि रविवार होने के कारण आदेश नहीं हुआ है। अधिकारियों की मानें तो सोमवार को रेंजर के हटाने का आदेश हो सकता है। स्थिति यह है कि १७ दिन के भीतर एक बाघ, एक बाघिन, एक शावक और एक तेंदुए का शिकार कर लिया जाता है। इसके अलावा एक अन्य बाघ की शहर से सटे गांव में शव मिलता है लेकिन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। अधिकारियों ने छोटे स्तर पर कार्रवाई करते हुए अपने बचाव के लिए खानापूर्ति कर ली है।
कुदरी में फुटप्रिंट के बाद शावक का मूवमेंट
कुदरी में बाघ के फुटप्रिंट मिलने के बाद अब शावक का मूवमेंट है। वन विभाग के अनुसार रविवार को गांव में बाघ शावक नजर आया, जिसकी सूचना ग्रामीणों ने विभाग को दी थी। डीएफओ के अनुसार सूचना मिलते ही गांव में सर्चिंग टीम भेजी है। जिन ग्रामीणों ने सूचना दी थी उनसे बात करते हुए शावक की तलाश की जा रही है। हालांकि रात दस बजे तक टीम को ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला। लगातार पिछले एक हफ्ते से कुदरी में बाघ के मूवमेंट से गांव में दहशत का माहौल है।
प्रमोशन के लिए अफसर की बचा रहे कुर्सी
सूत्रों की मानें तो वन विभाग के एक बड़े अधिकारी का प्रमोशन तय है। लगातार चार बाघों की मौत मामले में हाईकमान भी कुर्सी के लिए अधिकारी को बचा रहे हैं। इसी वजह से अब तक किसी
भी अधिकारी पर बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के चलते वन मंडल एरिया पर भी मुख्यालय स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं। हालांकि एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) ने तलब करते हुए अर्जेंट रिपोर्ट मांगी है, जिससे वन विभाग और अफसरों में हड़कंप की स्थिति बनी है।
पांच दिन बाद भी शावक को ढूंढने में नाकाम
बाघिन की मौत के बाद अब शावक को ढूंढने में अफसरों का पसीना छूट रहा है। बाघिन की मौत के बाद अब शावक की जान को लगातार खतरा बढ़ता जा रहा है लेकिन विभाग शावक को ढूंढने में नाकाम साबित हो रहा है। घुनघुटी सहित आसपास के जंगलों में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स और बांधवगढ़ की टीम सर्चिंग कर रही है। जंगल में शावक की सर्चिंग के लिए ४० से ज्यादा कर्मचारियों की टीम उतारी गई है लेकिन शावक का कोई सुराग नहीं मिला है। इसके अलावा हाथी दल भी शावक को नहीं तलाश सका है। हाल ही में घुनघुटी के आमगार में एक बाघिन का शिकार किया गया था। कुछ दूरी में एक शावक का भी शव मिला था। बाघिन के साथ दो शावक थे, जिसमें एक शावक को ढूंढने जंगलों में सर्चिंग की जा रही है। स्थिति यह है कि पांच दिन बीतने के बाद भी हाथ खाली है।
अब तक की कार्रवाई पर एक नजर
कल्याणपुर गांव में बाघ की मौत मामले में जांच के बाद लापरवाही पर डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने डिप्टी रेंजर कमला वर्मा और वन रक्षक संकल्प सिंह को निलंबित किया। बाघ की मौत के पहले मूवमेंट की जानकारी न देने पर फारेस्टर सिंहपुर निलंबित। मॉनीटरिंग कमजोर होने पर रेंजर शहडोल को अमझोर अटैच करने की कार्रवाई।
इनका कहना है
साउथ डीएफओ प्रदीप मिश्रा के मुताबिक कल्याणपुर बाघ की मौत मामले में फारेस्टर के अलावा रेंजर की लापरवाही भी मिली है। रेंजर को शहडोल से हटा दिया गया है। जांच के बाद अन्य पर भी कार्रवाई होगी।
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Published on:
18 Dec 2017, 11:43 AM IST
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