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जिला अस्पताल में नहीं है कैंसर वार्ड, डे-केयर के लिए सामान्य मरीजों के साथ होता है इलाज

शासन से मिलने वाली दवाइयां उपलब्ध नहीं, प्रशिक्षित स्टॉफ की भी कमी

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- महीनों से मरीजों की कीमोथैरेपी भी नहीं हो रही: कोई स्टाफ बदल गया तो कोई अप्रशिक्षित
शहडोल. जिला चिकित्सालय में कैंसर वार्ड न होने के कारण मरीजों सामान्य मरीजों के साथ रखा जाता है। जिसके के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में कैंसर पीडि़तो का कीमोथेरेपी व पेलिएटिव डे-केयर किया जाता है, लेकिन यहां कैंसर यूनिट न होने से मरीजों को आइसीयू या जनरल वार्ड में मरीजों के साथ रखकर इलाज किया जाता है। महीने में 5-6 मरीजों को उपचार किया जा रहा है। एसे में इम्यूनिटि कमजोर वाले मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कैंसर जैसी घातक बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए अस्पताल में जरूरी सुविधाओं के साथ प्रशिक्षित नर्स व स्टॉफ नहीं होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही मुफ्त मिलने वाली दवाइयों का भी अभाव रहता है।
खुद लानी पड़ती दवाई
मरीज के परिजनों की माने तो अस्पताल में कैंसर रोगियों को शासन से मिलने वाली मुफ्त दवाईयां उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण बाहर से दवा लेकर आना होता है। दवा न होने की स्थिति में मरीजों को वापस कर दिया जाता है। अस्पताल में उपचार तो शुरू कर दिया गया लेकिन सुविधाएं न होने से मरीजों को परेशान होना पहड़ता है। बताया गया कि कैंसर यूनिट में डे-केयर के लिए चार बिस्तर का बेड, चार प्रशिक्षित स्टॉफ व एक मेडिकल ऑफीसर का होना अनिवार्य हैं। लेकिन जिला चिकित्सालय में बिना सुविधाओं के ही उपचार शुरू कर दिया गया है।
पूर्व में 48 मरीजों की हुई थी जांच
बीते दिनों समाजसेवी संस्था सांझी रसोई ने रक्तदान के साथ ही कैंसर मरीजों की नि:शुल्क जांच के लिए शिविर आयोजित किया था। शिविर में 48 मरीज पहुंचे थे। जिनकों कैंसर से संबंधित समस्या थी। रायपुर से आऐ कैंसर विशेषज्ञों ने मरीजों की जांच कर जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी थी।
बाहर उपचार ले रहे मरीजों का होता है डे-केयर
जिला चिकित्सालय में बहार इलाज कराने वाले मरीजों के लिए डे-केयर की शुरुआत की गई है। यहां डॉ. गंगेश टांडिया के माध्यम से मरीजों की जांच कर केयर किया जाता है। इसमें को कीमोथेरेपी के साथ ही मरीजों को समय-समय पर होने वाली जांच, दवाई व स्वास्थ्य सुधार के लिए अन्य आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराई जाती है। इसमें मरीजों को एक दिन अस्पताल में रखा जाता है और शाम को वापस भेज दिया जाता है लेकिन अस्पताल में केंसर यूनिट अलग स्थिापित न होने से मरीजों को आइसीयू या जनरल वार्ड में रखकर उपचार किया जाता है।