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इसलिये मण्डी में अनाज नही बेंच रहे किसान………

नवम्बर माह का अभी तक नही हो पाया भुगतान

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Therefore the farmers are not sell grain in Mandi

Therefore the farmers are not sell grain in Mandi

शहडोल. जिले में भावांतर योजना की हालत खस्ता नजर आ रही है। किसानों की मण्डी तक पहुंचने की जो रफ्तार है वह साफ बयां कर रही है कि जिले के किसान इसमें रुचि नही ले रहे हैं। कृषि विभाग ने जिले से 21 हजार 347 किसानों का पंजीयन किया था। जबकि मण्डी तक किसानों के पहुंचने का जो आंकड़ा है वह हजार के पार नही पहुंच पाया है। वहीं जिन किसानों ने अपना अनाज मण्डी तक पहुंचाया है वह भी अपने आप को छला सा महसूस कर रहे हैं। जिसकी वजह किसानों के अनाज का भुगतान न होना माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि 1 नवम्बर से 30 नवम्बर के बीच जिन किसानों ने मण्डी में अपना अनाज बेंचा हैं उनमें से कई किसानों का भुगतान अधर में लटका है। अभी इस सप्ताह भुगतान होने की दूर-दूर तक कोई संभावना भी नही है।
जिले में भावांतर योजना के तहत किसानों की अनाज खरीदी का मामला शुरु से ही विवादों में रहा है। पहले तो मण्डी की बजाय बाजार में खरीदी का दौर चला। इसके बाद मण्डी में ही व्यापारियों को अनाज बेंचे जाने को लेकर विवादास्पद स्थिति निर्मित हुई। जिसके बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। जिसके बाद किसानों का अनाज मण्डी तक पहुंचना शुरू हुआ।
संभाग के अन्य जिलों की स्थिति
संभाग के अन्य जिलो की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। अनूपपुर जिले में 255 किसानों से 22 लाख 77 हजार 772 रुपये का 1371.099 क्विंटल अनाज अभी तक खरीदी गया हैै। वहीं उमरिया जिले में 872 किसानों ने 52 लाख 22 हजार 909 रुपये का 2421.885 क्वंटल अनाज अभी तक बेंचा है।
अब कुछ दिन ही रह गए शेष
भावांतर योजना के तहत उड़द, मक्का, सोयाबीन, मूंग, तिल, रामतिल व अन्य अनाजों की खरीदी के लिये कुछ ही समय शेष रह गया है। योजना के तहत उड़द खरीदी के लिये महज दो दिन शेष रह गये हैं। मण्डी में उड़द की खरीदी 22 दिसम्बर तक ही की जानी है वहीं सोयाबीन की खरीदी 31 तक ही मण्डी में की जायेगी। अभी तक जिले की मण्डियों में पंजीकृत 21 हजार किसानों में से 805 किसानों ने 2 करोड़ 94 लाख 41 हजार 265 रुपये का लगभग 11 हजार 339 क्विंटल अनाज की खरीदी की गई है।
इनका कहना है
कृषि विभाग द्वारा किसानों का पंजीयन किया गया था। जिले में उक्त अनाजों की फसल की पैदावार बहुत कम हुई है। जिस वजह से आवक कम है। नवम्बर माह के भुगतान के लिए भोपाल भेजा गया है। वहां से राशि मिलने के पर किसानों को भुगतान होगा।
सीबी सिंह, मण्डी सचिव शहडोल