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इसलिए है यहां खेलों का ऐसा हाल, दफ्तर के चक्कर काट रहे नेशनल खिलाड़ी

दो साल से नहीं मिला खिलाडिय़ों को सर्टिफिकेट

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Therefore there is such a situation of sports

Therefore there is such a situation of sports

शहडोल- खेल प्रतिभाओं में नेशनल स्तर तक शहडोल की पहचान बनाने वाले खिलाडिय़ों को अब सर्टिफिकेट के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। खिलाडिय़ों को शहडोल से रीवा और अन्य जगहों के लिए भटकाया जा रहा है। विडंबना की बात तो यह है कि दो साल बीतने के बाद भी खिलाडिय़ों को सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। खिलाड़ी पिछले दो सालों से लगातार कॉलेज और दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन प्रबंधन गंभीर नहीं है। शहर के बॉस्केटबाल खिलाड़ी प्राची दुबे और शिवानी गुप्ता सहित तीन अन्य खिलाडिय़ों ने 2014-15 में यूनिवर्सिटी स्तर से नेशनल लेबल पर बीएचयू में शामिल हुई थी।

यहां पर प्राची दुबे सहित शिवानी ने बेहतर प्रदर्शन किया था। बकायदा इन खिलाडिय़ों के सर्टिफिकेट यूनिवर्सिटी को भेज दिए गए थे लेकिन दो साल बीतने के बाद भी खिलाडिय़ों तक नहीं पहुंचा है।

बास्केटबाल खिलाड़ी प्राची दुबे और शिवानी गुप्ता ने बताया कि सर्टिफिकेट के लिए शहडोल से लेकर रीवा तक चक्कर काटे हैं। इसके बाद भी सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। खिलाड़ी प्राची का कहना है कि रीवा यूनिवर्सिटी में कहा जा रहा है कि शहडोल कॉलेज द्वारा सॢटफिकेट ले जाया गया है। उधर खेल विभाग के अधिकारी का कहना है कि ऐसा कोई सॢटफिकेट आया ही नहीं, इससे खिलाडिय़ों को भटकना पड़ रहा है। कई मर्तबा शिकायत भी की गई लेकिन इस दिशा में कोई प्रभावी नतीजा नहीं निकला।

रीवा में रिसीव किया सर्टिफिकेट
बास्केटबाल खिलाड़ी प्राची दुबे का कहना है कि शहडोल कॉलेज प्रबंधन के हाथ खड़े करने के बाद रीवा जाने की सलाह दी गई। खिलाडिय़ों ने रीवा में भी संपर्क किया। यहां पर बताया गया कि गल्र्स कॉलेज में पूर्व में पदस्थ खेल अधिकारी एसबी पांडेय द्वारा सर्टिफिकेट रिसीव कर लिया गया है। जिसके बाद खिलाडिय़ों को फिर से शहडोल के लिए लौटना पड़ा। रीवा में प्राची दुबे, पूर्णिमा सिंह, शिवानी गुप्ता, लक्ष्मी द्विवेदी और दीपाली गुप्ता के सर्टिफिकेट को ८ सितंबर २०१७ को शहडोल से एसबी पांडेय द्वारा रिसीव करना बताया गया।

कोर्ट जाने की तैयारी में खिलाड़ी
बार बार दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी सर्टिफिकेट न मिलने के बाद अब खिलाड़ी कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। खिलाडिय़ों का कहना है कि इस संबंध में यूनिवर्सिटी कुलपति से बात की जाएगी। इसके बाद भी सर्टिफिकेट नहीं मिलता है तो कोर्ट की शरण ली जाएगी।