
Mounting stones from the mountains dug from the ground
उमरिया- शहडोल-चौरी मार्ग पर स्थित इस ग्रामीण अंचल की जमीन खोद कर अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा है। पहाड़ों से पत्थर तोड़ कर गिट्टियां बेंची जा रहीं हैं। नदी नालों से रेत निकाल कर उसका व्यापार किया जा रहा है। यह गोरखधंधा पिछले कई वर्षों से चल रहा है। इससे शासन के राजस्व की तो क्षति हो ही रही है। साथ ही दुर्घटनाओं का भय भी बना हुआ है। यह मामला पाली थाना क्षेत्रांतर्गत स्थित ग्राम ओदरी व उसके आसपास के गांव मेढ़की व बकेली का है। जहां प्राकृतिक संपदाओं का जमकर दोहन किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन इसके विरुद्ध ठोस अभियान चलाने और धरपकड़ करने की बजाय उदासीन बना हुआ है। जिससे प्राकृतिक संसाधनों का अवैध व्यापार करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
बताया गया है कि पुलिस कभी-कभार कोयले की धर-पकड़ कर चुप्पी साध लेती है। यह संपदा खनिज विभाग के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन खनिज विभाग व राजस्व विभाग के अधिकारी कभी भी इस क्षेत्र में दौरा नहीं करते हैं। बताया गया कि यहां सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण यही कार्य कर रहे हैं।
इस क्षेत्र के आस-पास स्थित पहाड़ों और जमीन के बड़े पत्थर फोड़कर उसे छोटे टुकड़ो में बांटा जाता है। यहां पांच की संख्या में क्रेसर संचालित हो रहे है। इन क्रेसरों से पत्थरों को गिट्टी में बदलकर उनका व्यापार किया जाता है। जबकि इसकी न तो प्रशासन से अनुमति ली गई और न उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत रायल्टी दी जाती है। एक जानकारी के अनुसार ट्रेक्टर की एक ट्राली गिट्टी औसतन तीन-चार हजार रुपये में बेची जा रही है। यहां के ग्रामीण दिन भर पत्थरों को तोड़कर उसके टुकड़े बनाने में लगे रहते है। इसकी एवज में उन्हे नाम मात्र की मजदूरी मिलती है। जबकि अधिकांश मुनाफा गिट्टी के विक्रेता ले जाते है। जमीन से पत्थरों की ताबड़तोड़ निकासी के कारण जमीनों में गहरे गड्ढे होते जा रहे है।
इनका कहना है
उमरिया कलेक्टर माल सिंह के मुताबिक ओदरी ग्राम व उसके आस-पास के ग्रामीण अंचलों में यदि प्राकृतिक संपदा का मनमाना दोहन हो रहा है तो उसे तत्काल दिखवाया जायेगा और उस पर नियंत्रण कायम किया जायेगा।
Published on:
02 Dec 2017 12:23 pm
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