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भाजपा सरकारों के इस कदम ने कर दिया नाराज , चुनाव में पड़ेगा भारी

छीन लिए दो मंत्री, दिए एक भी नहीं, नाराज हैं इस अंचल के लोग

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शहडोल. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार के कदमों से इस अंचल के लोग काफी नाराज हैं। दोनों सरकारें इस अंचल की लगातार उपेक्षा कर रहीं हैं, यहां से दो-दो मंत्री थे दोनों को हटा दिया लेकिन उनके बदले में एक भी मंत्री पद नहीं दिया है। यहां तक कि शनिवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भी आदिवासी अंचल की उपेक्षा की गई है। इस बात से यहां की जनता तो नाराज है ही साथ में भाजपा के कार्यकर्ता भी काफी नाराज बताए जा रहे हैं। इस बात का असर आने वाले चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।
लम्बे समय से चली आ रही इंतजार की घड़ी समाप्त हो गई, लोग शिवराज सरकार की ओर टकटकी लगाए रहे कि आदिवासी क्षेत्र को शिव की सरकार में जगह मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं होने से लोगों में मायूसी दिखाई दे रही है। लोग उम्मीद और कयास लगा रहे थे कि आदिवासी अंचल से किसी एक सीनियर विधायक को सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कभी प्रदेश में शहडोल जिले से वरिष्ठ विधायक जैतपुर जयसिंह मरावी और उमरिया जिले की मानपुर विधायक मीना सिंह प्रदेश मंत्रिमण्डल का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन शिवराज ने आदिवासी अंचल को उपेक्षित कर दिया जिसका असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में स्पष्ट दिखाई देगा। शिवराज द्वारा आदिवासी अंचल से अभी आदिवासी जिले डिण्डौरी से ही ओमप्रकाश धुर्वे को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। इसके पहले उमरिया जिले से ज्ञान सिंह को मंत्रिमण्डल में शिवराज ने जगह दी थी, इनके सांसद चुने जाने के बाद उम्मीद थी कि वरिष्ठ आदिवासी विधायक जयसिंह मरावी को मंत्रिमण्डल में शामिल किया जाएगा, लेकिन आदिवासियों की उपेक्षा मंत्रिमण्डल में की गई। मण्डला जिले से भी किसी आदिवासी विधायक को जगह नहीं मिलने से लोग और भाजपा पार्टी कार्यकर्ता मायूस हैं।


पहले मोदी भी दे चुके हैं झटका
शिवराज सिंह चौहान से पहले नरेंद्र मोदी भी इस अंचल को झटका दे चुके हैं। यहां के कद्दावर नेता फग्गन सिंह कुलस्ते को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। माना जा रहा था कि कुलस्ते को संगठन में कोई बड़ा पद दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी वे वेटिंग लिस्ट में ही हैं। उसके बाद अब शिवराज सिंह सरकार ने झटका दिया है। मंडला, डिंडोरी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया इन पांचों जिलों में एक मात्र मंत्री हैं ओमप्रकाश धुर्वे। धुर्वे भी अपनी सीट तक ही सीमति हैं, जिससे इस अंचल की उम्मीदें पूरी नहीं हो पा रहीं हैं। अब लोगों द्वारा प्रतिनिधित्व नहीं मिलने को लेकर जहां एक तरफ हैरानी जताई जा रही है, वहीं लोगों में नेतृत्व नहीं मिलने को लेकर निराशा देखी जा रही है।


कांग्रेस बना रही मुद्दा
मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से कांग्रेस इस मामले को हवा दे रही है। कांग्रेस के नेता आदिवासी अंचल की उपेक्षा का आरोप लगाकर जनता की नाराजगी का फायदा उठाना चाह रही है, जिसके चलते भाजपा कार्यकर्ताओं का काफी दिक्कतों और सवालों का सामना करना पड़ रहा है। उधर भाजपा कार्यकर्ताओं में भी असंतोष नजर आ रहा है। शनिवार शाम को भाजपा की एक बैठक हुई थी। बैठक तो अन्य किसी मुद्दे पर थी लेकिन उसमें आदिवासी अंचल की उपेक्षा का मुद्दा छाया रहा। वरिष्ठ नेता चाहकर भी इस मामले को नहीं दबा सके।