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OMG! ये नेताजी वसूली करके बटोरते  हैं सुर्खियां

ऑडियो वायरल के बाद नेता जी बाई कट, चुनावी कुम्भ को छोड़कर अब स्टेडियम में खेल का ले रहे मजा 

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Shahdol online

Nov 13, 2016

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शहडोल। एक बड़ी पार्टी के पदाधिकारी का हाल ही में पैसा मांगने का ऑडियो वायरल होने के बाद अब चुनाव से बाई कट कर दिया गया है। हाईकमान से नेता जी को तबज्जो न मिलने के बाद अब नेता जी भी चुनावी कार्य से लगभग दूरी बना चुके हैं। स्थिति यह है कि चुनावी कुम्भ को छोड़कर अब स्टेडियम में खेल का मजा ले रहे हैं। नेता जी पूर्व में भी कई बार वसूली के मामलों में काफी सुर्खियां बटोरी हैं, हालांकि दोबारा भी नेता जी को मौका दे दिया गया था।


ऑडियों ने कटघरे में किया खड़ा

महोदय ने तो अपने मोबाइल शौक को पूरा करने के लिए जिले के एक बड़े प्रशासनिक लाट साहब को भी ऑडियो में कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया था। प्रशासन के बड़े लाट साहब ने भी सफाई के साथ पेश आते हुए प्रदेश के माननीय का खास होने का पूरा फायदा उठाया और खुद को बचाकर ले गए। प्रशासन के इस बड़े स्तर पर अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अभी भी आयोग का चाबुक इन लाट साहब पर चल सकता है।

न हो ..या बार का होई...

उमरिया। चुनावी माहौल में इनदिनों जहां बैठो एक ही बात सुनने को मिल रही है - न हो ..........या बार का होई। सब जानते हुए भी लोगों का ये सवाल निश्चित ही चुनावी बयार को सोचने व समझनें में मजबूर कर देता है। इस बीच कोई भी अपने दिमाग की चुनावी खिचड़ी बताने को तैयार नहीं है। इस समय ऐसे भी लोग सक्रिय दिख रहे हैं जिनका राजनीतिक गतिविधियों से भविष्य में कभी भी दूरदराज का संबंध नहीं रहा है। परंतु चुनावी फायदा उठाने की जुगत में अपनी राय लोगों से बता रहे हैं। अल्प समय में चुनावी बयार में डुबकी लगा कुछ फायदे की तलाश में ऐसे लोग रातों रात केन्द्र सरकार के बड़ी नोटों पर प्रतिबंध के तुगलकी फरमान से भी परेशान हो उठे हैं और अब गांवों मेंं महज चौपाल लगा अपनी मिथ्या चुनावी समीकरण गरीब आदिवासियों को बता रहे हैं।

हर समय बन बिगड़ रहा गणित

इन दिनों ऐसे लोग अधिकांश हर गांव में मौजूद हैं जो क्षेत्र में हो रहे चुनावी हलचल का लाईव टेलीकास्ट ग्रामीणों के साथ चौपाल लगा कर अपनी राय साझा कर रहे हैं देखने में यह भी आ रहा है कि ऐसे लोग सुबह किसी के पक्ष में अपनी राय रख रहे हैं और शाम को किसी और दल के समर्र्थन की बात कह ग्रामीणों की चुनाव के प्रति उत्सुकता बढ़ा रहे हैं। गरीब आदिवासियों को भी शायद इन्ही पर भरोसा भी होता है तभी तो सुबह शाम ये गरीब आदिवासी इनसे पूछते हैं न हो .......या बार का होई।।

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