आदिवासी बाहुल्य संभाग में महुए का गोरखधंधा आदिवासियों के नाम पर चलाया जा रहा है। बिचौलिए आदिवासियों के माध्यम से जंगलों से महुआ एकत्रित करवाते हैं, इसके बाद उन्हीं के घरों और बाजारों से महुआ खरीदकर अपने यहां भंडारित कर रहे हैं। इस की जानकारी वन अमले के साथ-साथ जिला प्रशासन को भी है, लेकिन महुआ का गोरखधंधा करने वाले कारोबारियों पर आज तक कार्रवाई नहीं की जा सकी है। बिचौलिए आदिवासी परिवारों पर पूरी नजर रखते हैं, जैसे ही घर पहुंचा महुआ सूखने लगता है, वे खरीदी के लिए पहुंच जाते हैं।