
शहडोल - दीपावली के दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन और गो पूजा का विशेष महत्व होता है। कोयलांचल में भी गोवर्धन पूजा की धूम है। लोग इसे बड़े उत्साह और श्रृद्धा भाव के साथ मना रहे हैं। ऐसा माना जाता है की इस दिन गाय की पूजा करने के बाद गाय पालक को गिफ्ट और अन्न वस्त्र देना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। वृंदावन और मथुरा में इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा की क्या है कहानी ?
ऐसा माना जाता है की भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण गोकुल वासियों को इंद्र के कोप से बचाया था। इन्द्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत से गोकुल वासियों को पशुओं के लिए चारा मिलता है और यही पर्वत यहां बादलों को रोककर वर्षा करवाता है, जिससे कृषि उन्नत होती है। इसलिए गोवर्धन पर्वत पूजा की जानी चाहिए। तभी से गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।
कैसे की जाती है गोवर्धन पूजा ?
दिवाली के ठीक बाद गोवर्धन व अन्नकूट पूजा की जाती है। इस दिन खास पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है। इस दिन गोबर का गोवर्धन बनाया जाता है इसका खास महत्व होता है। इस दिन सुबह-सुबह गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है। यह मनुष्य के आकार के होते हैं। गोवर्धन तैयार करने के बाद उसे फूलों और पेड़ों के डालियों से सजाया जाता है। गोवर्धन को तैयार कर इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। गोवर्धन में ओंगा यानि अपामार्ग की डालियां जरूर रखी जाती हैं।
Published on:
20 Oct 2017 01:41 pm
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