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जन्मदिवस विशेष : आज भी सलाखों में कैद काकोरी कांड के महानायक

इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि जिन महानायकों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये उन शहीदों की प्रतिमाएं आज आजाद देश में कैद हैं।

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Amit Sharma

Jun 11, 2016

Pandit RAM Prasad Bismil

Pandit RAM Prasad Bismil

शाहजहांपुर। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, ये वो नाम है जो महज 30 साल की उम्र देश के लिए कुर्बान हो गये। बिस्मिल के 119वें जन्मदिवस पर देश उनको याद कर रहा है। 11 जून, 1897 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में रामप्रसाद बिस्मिल काकोरी कांड के महानायक रहे। साथ ही वर्ष 1918 में हुए मैनपुरी कांड में भी अहम भूमिका निभायी थी।

ये है काकोरी कांड
ब्रिटिश हुकूमते से लड़ने के लिए जब रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां को हथियार खरीदने के लिए पैसों की जरुरत पड़ी थी तो इन्होंने सरकारी खजाने को लूटने की योजना बनायी। जिसके बाद नौ अगस्त, 1925 को लखनऊ से पहले काकोरी जगह पर ट्रेन में अंग्रेजों द्वारा ले जाए जा रहे सरकारी खजाने को अपने साथियों के साथ मिलकर लूट लिया। ट्रेन डकैती के आरोप में दोनों नौजवानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और मुकदमा चलाया। 19 दिसंबर 1927 को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर की जेल में फ़ांसी पर लटका दिया गया। वहीं अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में फांसी दे दी गयी।

कॉलेज में कैद बिस्मिल व अशफाक की प्रतिमाएं
भले ही आज पूरा देश उनको याद कर रहा हो लेकिन काकोरी कांड के महानायक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां की प्रतिमाएं पिछले चार दशकों से लोहे की सलाखों में कैद हैं। शहर के के एबीरिच इंटर कॉलेज में बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां की इन प्रतिमाओं को आज तक किसी ने भी आजाद करवाने की जहमत नहीं उठाई है।

एबीरिच कॉलेज में पढ़े थे दोनों महानायक

पंडित रामप्रसाद बिस्मिल शहर के मोहल्ला खिरनी बाग़ में अपनी बूढ़ी मां के साथ रहकर इसी कॉलेज में पढ़ते थे। अशफाफ उल्ला खां ने भी इसी कॉलेज से तालीम ली थी। बिस्मिल और अशफाक की दोस्ती इसी कॉलेज से हुई थी, जो फांसी के तख्ते पर लटकने से लेकर आज भी इस कॉलेज में लोहे की सलाखों में कायम है।

छात्र संगठन ने बनवाई थीं प्रतिमाएं
बता दें कि साल 1947 के बाद एबीरिच इंटर कॉलेज के छात्र संगठन ने अशफाक उल्ला खां और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की कॉलेज परिसर में प्रतिमाएं लगवाने का विचार किया। छात्रों ने रातोंरात कॉलेज परिसर में इन प्रतिमाओं को खड़ा करवा दिया। वजह साफ़ थी कि अशफाक और बिस्मिल दोनों ही अमर शहीद इसी कॉलेज के छात्र थे और देश हित में हंसते हंसते फाँसी फंदे पर झूल गये थे लेकिन उस वक्त के अधिकारियों ने उन छात्रों को पकड़कर जेल में डाल दिया था। इसके साथ ही बिस्मिल और अशफाक की प्रतिमाओं लोहे की मोटी मोटी सलाखों में कैद कर दिया। जिन्हें आज तक किसी भी राजनेता या फिर अधिकारी ने आजाद नहीं कराया।

शहीदों का परिवार दुखी
शहर में आज इन्हीं शहीदों की स्मारक और प्रतिमाएं बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। अशफाक उल्ला खां के परिवार इस बात से बेहद दुखी है कि आज सरकार इन शहीदों को भूल चुकी है।


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