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UP News: शाहजहांपुर का जलालाबाद बना परशुरामपुरी! वर्षों पुरानी मांग को मिली ऐतिहासिक मंजूरी

UP News: शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम अब परशुरामपुरी कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है।

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UP News: शाहजहांपुर का जलालाबाद बना परशुरामपुरी! Image Source - Social Media 'FB'

UP News In Hindi: यूपी के शाहजहांपुर जिले का जलालाबाद नगर अब नए नाम परशुरामपुरी से जाना जाएगा। लंबे समय से चली आ रही इस मांग को आखिरकार मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है।

गृह मंत्रालय की मुहर

प्रदेश सरकार ने पहले ही जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद प्रदेश के प्रमुख सचिव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर स्वीकृति देने की अपेक्षा जताई थी। गृह मंत्रालय ने बुधवार को पत्र जारी कर इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी।

केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने जताया आभार

नाम परिवर्तन को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने गृह मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह फैसला पूरे सनातनी समाज के लिए गर्व का क्षण है।

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। यहां उनका प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर स्थित है। इस वजह से लंबे समय से यहां की जनता नगर का नाम परशुरामपुरी रखने की मांग कर रही थी। नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 और सितंबर 2023 में इस प्रस्ताव को बोर्ड की बैठक में पास किया था।

प्रदेश सरकार का अनुमोदन

अप्रैल 2024 में शाहजहांपुर के जिलाधिकारी ने पालिका बोर्ड की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को शासन को अग्रसारित कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने इसे स्वीकार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को अंतिम अनुमोदन के लिए भेजा था।

वर्षों पुरानी मांग पूरी

भगवान परशुराम की इस नगरी को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आस्था हमेशा से गहरी रही है। इस नगर का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने की मांग वर्षों से उठती रही थी। आखिरकार अब यह ऐतिहासिक मांग पूरी हो गई है।

पहले ही घोषित हो चुकी थी जन्मस्थली

24 अप्रैल 2022 को पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने मंदिर प्रांगण में आयोजित सभा के दौरान जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली घोषित किया था। उन्होंने मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा भी की थी।

30 करोड़ की धनराशि से हो रहा विकास

जन्मस्थली घोषित होने के बाद प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री संवर्धन योजना के तहत 19 करोड़ रुपये और अमृत सरोवर योजना के तहत 11 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। इस धनराशि से मंदिर प्रांगण का सौंदर्यीकरण, रामताल का जीर्णोद्धार, घाट और पाथ-वे का निर्माण तथा श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।