
rajpal yadav
शाहजहाँपुर। पापा आपने मुझ पर भरोसा किया है। आप खून पसीने की एक-एक पाई मेरी परवरिश में लगा रहे हो मैं आपके इस भरोसे को टूटने नहीं दूंगा। ऐसा कहा था हास्य कलाकार राजपाल यादव ने। उनकी ये बात उनके घर में प्रचलित है। दरअसल राजपाल यादव की बेटी की रविवार को शादी थी जहां पर ऐसी बातें उनके जानने वाले कह रहे थे। लोग बताते हैं कि जब भी राजपाल यादव घर आते हैं तो अपने पिता के पैरों को पकड़कर कुछ देर के लिए बैठते है। अपनी कही हुई पुरानी बातें भी दोहराते हैं। आइए हम आपको बताते हैं राजपाल यादव की अनसुनी बातें।
छह में दूसरे नंबर पर राजपाल
हास्य फिल्म अभिनेता राजपाल यादव का जन्म लगभग 46 साल पहले शाहजहांपुर जिले के पुवायां तहसील के बण्डा थाना क्षेत्र के कुड़रा गांव में नौरंग सिंह यादव और हुआ था। इनका बचपन बेहद ही कठिनाइयों भरा गुजरा। छह भाइयों में राजपाल यादव दूसरे नम्वर के थे। राजपाल के बड़े भाई श्रीपाल यादव और उनके गुरु जरीफ मालिक आनंद की माने तो राजपाल पिता जी को बहुत प्यार करता है। घर में दूध का कारोबार होता था। परिवार बड़ा होने के चलते तमाम तरह की परेशानियां थी। लेकिन फिर भी राजपाल का नाम पढ़ने के लिए गांव के ही प्राइमरी स्कूल में दाखिला करवा दिया। इसके बाद राजपाल शाहजहांपुर के राजकीय इण्टर में पढ़ने के लिए चले गए।
राजपाल अपने गांव कुंडरा से 60 किमी दूर पैदल और बस से शाहजहांपुर पढ़ने आते थे। कई महीनों तक इसी तरह आना जाना किया। जब यह परेशानी राजपाल के पिता नौरंग सिंह से देखी नहीं गई तो पिताजी ने शाहजहांपुर में ही एक किराए का कमरा ले दिया। किराए के एक छोटे से कमरे में बड़े भाई श्रीपाल और राजपाल रहते थे। फिर भी राजपाल यादव के पिता नौरंग सिंह को संतुष्टि नहीं मिलती। जब तक पिता खुद घर से राशन गेहूं—चावल नहीं भेज दिया करते थे। राजपाल यादव अपनी पढ़ाई के दौरान ही जरीफ मालिक आनंद के पास अभिनय सीखने लगे थे।
शाहजहांपुर के आर्डिनेंस क्लोथिंग फैक्ट्री की रामलीला में अंगद का अभिनय कई साल तक किया। राजपाल ने शाहजहांपुर ओर्डिनेंस क्लोथिंग फैक्ट्री से अप्रेंटिस परीक्षा पास कर आप्रेटिंस भी की। एक अभिनेता के तौर पर स्टेब्लिश हो रहे थे तो राजपाल यादव को शाहजहांनपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने नौकरी ज्वाइन करने के लिए चिट्ठी भेजी। तो राजपाल यादव ने अपना नाम इसलिए वापस ले लिया कि व नौकरी नहीं लेंगे। उनके नौकरी न लेने से अगले किसी जरूरतमंद की जरूरत पूरी हो जाएगी।
राजपाल यादव के अभिनय गुरु जरीफ मालिक आनंद की माने तो जब राजपाल यादव 1990-91 के दशक में उनके पास अभिनय सीख रहे थे तो राजपाल यादव का "अंधेर नगरी" नाटक में बेहद ही अहम किरदार था। दो दिन बाद नाटक का मंचन होना था उसी वक्त राजपाल यादव पिता बने। उनकी पत्नी की मौत गयी। इसके बावजूद राजपाल यादव ने हिम्मत नहीं हारी और राजपाल यादव के पिता नौरंग सिंह ने उनका साथ दिया। शाहजहांपुर से कुड़रा गांव जाकर पत्नी की अंत्येष्टि कर वापस शाहजहांपुर आकर अपनी तैयारी में जुट गए।
Published on:
20 Nov 2017 02:52 pm
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