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मटमैले पानी ने खोले बीमारी के द्वार

पानी की खराबी से 16 दिन में 8 हजार से अधिक मरीज पहुंचे जिला अस्पताल, पीएचई की टीम कर रही दौरा, लोगों को समझाइश के साथ अधिकारी पेयजल स्रोत में डाल रहे क्लीनवेट

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शाजापुर. बारिश शुरू होते ही शहर में मटमैले और खराब पानी की समस्या शुरू होने लगी है। पानी की खराबी के चलते गांव की बड़ी आबादी बीमारी के जद में आने लगी है। जिला अस्पताल में बीते एक सप्ताह में प्रतिदिन बीमारों की संख्या बढ़ती जा रही हैं। इनमें पेटदर्द, उल्टी, दस्त, सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल में पिछले १६ दिनों में ८ हजार से अधिक मरीजों की संख्या पहुंची हैं। फिलहाल पीएचई की टीम गांव-गांव निरीक्षण कर पानी की शुद्धता जांचने के साथ ही ग्रामीणों को समझाइश भी दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश लगते ही जिले में १० हजार क्लीनवेट वितरित कर दी गई है। ५ हजार क्लीनवेट की डिमांड भेजी गई है।
बारिश की सीजन आते ही गंदा पानी के सेवन से अनेक लोग बीमारी जद में आ जाते हैं। गंदे पानी के सेवन का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर सामने आता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के पास ही गंदगी रहती है, कई जगह मवेशी भी बांधे जाते हैं। इससे उनका मल रिसता हुआ पेयजल में मिल जाता है, जिसके सेवन से लोग बीमारी की जद में आ जाते हैं। इसे देखते हुए पीएचई विभाग की टीम ने अपना निरीक्षण शुरू कर दिया है। पीएचई ईई आरएस डेहरिया ने बताया कि बारिश की शुरुआत से ही क्लीनवेट (क्लोराइड) की बाटॅल पेयजल स्रोतों में डालना शुरू कर दिया है। पानी की शुद्धता की जांच भी की जा रही है। ग्रामीणों को समझाइश भी दी जा रही है कि पानी का उबालकर पिये, पेयजलस्रोतों के पास गंदगी न फैलाएं, साथ ही गांव-गांव क्लीनवेट का वितरण भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों के पेयजल स्त्रोंतों में भी क्लीनवेट डालने के साथ ही इसका वितरण किया गया है।
5 हजार और क्लीनवेट की डिमांड भेजी
पीएचई ईई आरएस डेहरिया ने बताया कि जिले में इस सीजन में १० हजार क्लीनवेट पेयजल स्रोतों में डाली गई है और ग्रामीणों को वितरीत की गई है। जिले में और क्लीनवेटकी आवश्यकता है। इसके लिए ५ हजार क्लीनवेटकी डिमांड भेजी गई है। इस मौसम में गंदे पानी काफी शिकायत रहती है। डिमांड के मुताबिक क्लीनवेट आने पर उसका वितरण भी किया जाएगा। वहीं १ हजार क्लीनवेट तत्काल मांगी है। जिले के ग्राम हिरपुर टेका और तिंगजपुर में बीते सालों में खराब पेयजल के कारण अनेकों ग्रामीणों की तबीयत खराब हुई थी। ईई डेहरिया ने बताया कि दोनों ही गांवों में पेयजल स्रोतों के पास घूड़े बने हुए है, कईजगह हैंडपपों के पास ही मवेशी भी बने पाए गए।
एक बेड पर दो मरीजों का हो रहा उपचार
इधर मौसम परिवर्तन से जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सोमवार को महिला मेडिकल वार्ड की स्थिति यह रही कि यहां एक बेड पर दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया गया। बता दें कि इनमें ज्यादातर मरीज उल्टी-दस्त और बुखार के आ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उल्टी-दस्त के मरीजों में इजाफा हुआ है। जो एक दिन ही भर्ती होते हैं, बॉटल लगने से ठीक हो जाते हैं।
बारिश में गंदे पानी की समस्या बढ़ जाती है, जिसके सेवन से लोग बीमार होते हैं। इसे देखते हुए विभागीय टीम लगातार गांव-गांव पहुंचकर दौरान कर रही है। स्कूल, आंगनवाड़ी के साथ ही ग्रामीणों को समझाइश दे रही है। १० हजार क्लीनवेट का वितरण कर चुके हैं। ५ हजार क्लीनवेट की डिमांड भेजी गई है।
आरएस डेहरिया, ईई पीएचई
गंदे पानी के सेवन से उल्टी-दस्त, पीलिया जैसी बीमारी होती है। इन दिनों उल्टी दस्त के मरीजों में इजाफा हुआ है। अस्पताल में अधिक मरीज आने पर एक बेड पर दो मरीजों का उपचार कर दिया जाता है। ट्रामा सेंटर बनते ही ये समस्या खत्म हो जाएगी।
एसडी जायसवाल, सिविल सर्जन जिला अस्पताल