
शुजालपुर. इस वर्ष वर्षा ने विगत कई वर्षों के रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दशहरा निकल जाने के बाद भी क्षेत्र में मानसूनी गतिविधि जारी है, जो कि किसानों पर काफी भारी पड़ रही है। खरीफ कटाई के समय जारी मानसूनी गतिविधियों से क्षेत्र के किसानों का नुकसान हुआ है। ज्यादा बारिश के कारण खेतों में बर्बादी का मंजर साफ दिख रहा है.
तहसील शुजालपुर क्षेत्र में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात को मूसलाधार बारिश हुई। लगभग दो से तीन घंटे में 40 एमएम बारिश दर्ज की गई। तहसील शुजालपुर में अब तक 1361 एमएम वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य बारिश से लगभग 15 इंच अधिक है। उधर कालापीपल में और भी अधिक बारिश हुई। बीती रात कालापीपल तहसील क्षेत्र में 62 एमएम वर्षा दर्ज की गई तो अब तक कालापीपल तहसील में 1556 एमएम बारिश हो चुकी है जो कि वर्ष भर होने वाली सामान्य बारिश से 22 इंच अधिक है।
तीन माह से जिस फसल के लिए किसान ने लागत लगाई और मेहनत की वह फसल अब खेतों में भरे पानी में तैर रही है या खराब हो रही है। कई किसानों की बर्बादी का यह मंजर खेतों में दिखाई दे रहा है। किसानों ने खरीफ फसल के रूप में जुलाई के प्रथम सप्ताह में अधिकांश सोयाबीन की फसल खेतों में बोई थी, जिसकी परिपक्व होने की अवधि 75 से 90 दिन के बीच मानी जाती है। लगातार बारिश के कारण खेतों में ही सोयाबीन को 100 से 120 दिन तक हो चुके हैं। जो फलिया लगी हैं उनमें लगातार नमी के कारण दाने अंकुरित होने लगे हैं तो पौधे सड़कर खेतों में गिर रहे है।
किसान अनिल पाठक ने बताया कि गत सप्ताह हुई बारिश के बाद धूप खिली तो कटाई शुरू कर दी थी, लेकिन बारिश फिर से शुरू होने के कारण कटी हुई फसल खेतों में ही रखी हुई जो कि खराब हो रही है। कुछ खेतों में अभी भी पानी भरा है। गुर्दाखेड़ी के किसान लखनसिंह मेवाड़ा ने बताया कि क्षेत्र में किसानों को काफी नुकसान हुआ है। इस वर्ष फसलों की स्थिति संतोषजनक थी लेकिन मानसून की विदाई के समय जो बारिश हुई है उससे काफी नुकसान हुआ है। शासन एवं बीमा कंपनियों को सर्वे कर किसानों को मुआवजा व बीमा प्रदान करना चाहिए।
Published on:
12 Oct 2022 12:14 pm
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