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32 हजार हेक्टेयर में काली पड़ गई मूंगफली

किसानों की खेत मे पककर खड़ी फसल तबाह हो गई हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव मूंगफली पर पड़ा है. हजारों हेक्टेयर में बोई गई मूंगफली काली पड़ गई है.

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हरपालपुर. बीते तीन दिनों से क्षेत्र में हो रही बारिश के चलते खरीफ सीजन की फसलें खराब कर दी हैं। अतिवृष्टि के चलते किसानों की खेत मे पककर खड़ी फसल तबाह हो गई हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव मूंगफली पर पड़ा है. हजारों हेक्टेयर में बोई गई मूंगफली काली पड़ गई Groundnut blackened in thousands hectares है.

उड़द, मूंग, तिली पहले की लगातार बारिश के चलते खराब हो गई थी। किसानों को कुछ उम्मीद मूंगफली की फसल से थी अब वो भी दो दिनों से हो रहे बारिश के चलते खेत में ही अंकुरित होने लगी साथ जिन किसानों द्वारा मूंगफली की फ़सल उखाड़ कर खेतों में सूखने को पड़ी अब वो बारिश के चलते काली पडऩे लगी है। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।

नौगांव तहसील में 32 हजार हेक्टेयर में मूंगफली Groundnut in 32 thousand hectares की बोवनी की गई थी जो जिले में सबसे ज्यादा मूंगफली की बोवनी का रकबा हैं। सरसेड़ कैथोकर, कराठा, गलान लहदरा, इमलिया, रगौली, चिरवाई, जोरन अमां रानीपुरा के किसानों ने बताया कि बारिश के चलते खेतों में कुछ नहीं बचा हैं। लगातार बारिश के चलते मूंगफली अंकुरित होने लगी हैं। खरीफ फसल खराब होने चलते किसानों के सामने रबी सीजन की फसलों की बोवनी का संकट खड़ा हो गया हैं। रबी सीजन की फसलों की बोवनी के लिए खाद बीज कैसे जुटाए। अब किसान इसको लेकर परेशान हैं।

क्षेत्र के किसानों का कहना हैं कि अतिवृष्टी से तबाह हुई फसलों का सर्वे करा कर सरकार जल्द मुआवजा दिलाए, नहीं तो किसान पूरी तरह वर्बाद हो जाएगा। इमलिया निवासी किसान दीपचंद्र राजपूत ने बताया कि 50 बीघा में मूंगफली फसल बोई थी जो अतिवृष्टी के चलते पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। खेतों में पानी भरने से फसल बचने की उम्मीद भी नही है।