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Monsoon Update : अगस्त के कोटे में कम हुई इतनी बारिश, गहराने लगा चिंता

बारिश ने फेरा मुंह : कुएं-बावड़ी, ट्यूबवेल और भूमिगत जलस्तर में लगातार आ रही कमी, जिले में इस बार 92 प्रतिशत कम बारिश, प्रदेश में सबसे कम बारिश हुई शाजापुर में

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Monsoon (Image Source: AI)

शाजापुर. अगस्त की वार्षिक मौसम रिपोर्ट में शाजापुर जिले की स्थिति दयनीय रही है। जिले में पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 92 प्रतिशत कम बारिश हुई है। औसत बारिश के रिकॉर्ड से यह काफी दूर है। आने वाले समय में यह आंकड़ा पार कर पाना मुश्किल लग रहा है। मौसम की आंख-मिचौनी और मानसून की बेरुखी से जिले का बारिश का कोटा पूरा नहीं हो रहा है। पिछले साल इस समय तक औसत से ज्यादा बारिश हो गई थी, जो इस बार आधा आंकड़ा भी पूरा नहीं कर पा रही है। स्थिति यह है कि फुहारों वाली बूंदाबांदी के अलावा बारिश के हालात नहीं सुधर पाए हैं।

24 घंटे में इतनी बारिश भी नहीं हुई जो दर्ज हो पाए। कई हिस्सों में तो बादलों की लुकाछिपी चलती रही, बारिश ने गिरने की हिम्मत ही नहीं की। फसलों के लिए फायदेमंद जरूर माना जा सकता है, लेकिन पर्याप्त और फसलों के पकने जैसी बारिश यह नहीं है। साथ ही भूमिगत जलस्तर भी बढ़ नहीं पाया है। कुएं, बावड़ी, ट्यूबवेल, हैंडपंप के साथ ही बांधों की स्थिति खराब है, वे भी क्षमता अनुसार भर नहीं पाए हैं। इसी कारण अब किसान के साथ ही आम लोगों और विभागीय अधिकारियों को भी चिंता सताने लगी है कि नीति आयोग की रिपोर्ट में जल संरक्षण के लिए चर्चित शाजापुर की स्थितियां कैसे काबू की जाएंगी। गर्मी के अलावा बाकी समय ही यहां पानी के लिए त्राहिमाम जैसी स्थिति रहती है, ऐसे में कैसे आखिरकार यह पूर्ति की जाएगी।


फैक्ट फाइल

92 प्रतिशत कम बारिश शाजापुर
80 प्रतिशत कम बारिश उज्जैन
77 प्रतिशत कम आगर-मालवा
76 प्रतिशत कम बारिश राजगढ़
21.8 मिमी बारिश हुई (अगस्त में)
273 मिमी औसत बारिश है (अगस्त में)
1130.4 मिमी बारिश औसत पिछली बार
अभी तक 516.5 मिली बारिश औसत अभी तक हुई
990 मिमी औसत बारिश जिले की
(स्रोत-मौसम विभाग, भोपाल)


पिछले साल इस समय पूरा हो गया था कोटा पिछले साल हुई बारिश के बाद आंकड़ा काफी बढ़ गया था। 1130.4 एमएम यानी औसत से 140 मिमी ज्यादा बारिश पिछले साल इस समय तक हो चुकी थी। साथ ही चीलर डैम पूरा भरने के बाद लोगों ने इसका स्वागत भी कर दिया था, लेकिन इस बार आंकड़ा 516.5 मिमी ही पार कर पाया है। इसी कारण बारिश की स्थिति इस बार काफी दयनीय नजर आ रही है। माना जा रहा है कि बारिश और पानी वाले दो प्रमुख माह (जुलाई-अगस्त) बीत चुके हैं। अब सितंबर से ही महज आस बची है, जिसमें भी आधे सितंबर में बारिश के चले जाने की स्थिति बनती है।


प्रदेश के सबसे कम वर्षा वाले जिलों में शाजापुर पहले नंबर पर

प्रदेश के मौसम विभाग ने अगस्त के जारी किए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 16 जिले ऐसे हैं जहां अगस्त में सबसे कम बारिश हुई है। शाजापुर जिला प्रथम नंबर पर है। यहां अगस्त में सामान्य वर्षा 273 मिमी है, लेकिन इस बार महज 21.8 मिमी ही हुई है। ऐसे में शाजापुर जिले में 92 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस सूची में दूसरे नंबर पर नीमच है। यहां 88 प्रतिशत कम बारिश हुई है। तीसरे नंबर पर खंडवा है जहां 81 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसके बाद मंदसौर का नंबर है जहां 80 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पड़ोसी जिले उज्जैन में 80 प्रतिशत, आगर-मालवा में 77 प्रतिशत और राजगढ़ में 76 प्रतिशत कम बारिश हुई। ये प्रदेश के सबसे कम वर्षा वाले 16 जिलों में क्रमश: 5वें, 6ठे ओर 7वें नंबर पर हैं।


प्रदेश के 16 जिलों में अत्यंत कम बारिश की स्थिति रही है। शाजापुर जिला प्रथम है। पश्चिमी मप्र की स्थिति ही खराब रही है। मानसून ट्रफ पश्चिमी छोर अधिकांश समय सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर रहना और बंगाल की खाड़ी में कोई प्रभावशाली मौसम प्रणाली का नहीं होना ही कम बारिश का कारण बन रहा है। अभी आगे भी कुछ कहा नहीं जा सकता। सामान्य और बूंदाबांदी वाली बारिश के ही आसार निकट भविष्य में हैं।
एसके नायक, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक, भोपाल