
पीयूष भावसार
शाजापुर। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (Omkareshwar jyotirling) की तरह हूबबू शिवलिंग शाजापुर (shajapur) में भी है। इसे भी ज्योतिर्लिंग की तरह ही पूजा जाता है। यह शाजापुर जिला मुख्यालय पर धानमंडी क्षेत्र में है। यहां दर्शन और पूजन से ओंकारेश्वर के समान ही पुण्यफल की प्राप्ति होती है। श्रावण में यहां पर दर्शन और पूजन के लिए सुबह से लेकर रात तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इसे भी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग माना जाता है, इसके पीछे दिलचस्प कहानी है।
मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि उनकी कई पीढ़ियां मंदिर में पूजन और सेवा का कार्य करती आ रही हैं। उनके पूर्वजों ने मंदिर से जुड़ी किवंदती के बारे में जानकारी दी थी। इसके अनुसार प्राचीन काल में शाजापुर (प्राचीन नाम खाखराखेड़ी) में एक शिव भक्त थे। वे शिवभक्त प्रतिदिन घोड़े पर सवार होकर इंदौर के समीप ओंकारेश्वर पहुंचते थे। प्रतिदिन महादेव के दर्शन के बाद भी भक्त द्वारा अन्न-जल ग्रहण किया जाता था। कई वर्षों तक यह क्रम निरंतर जारी रहा, लेकिन वृद्धावस्था होने के कारण वह जाने में अक्षम हो गए। अक्षमता को लेकर शिव भक्त ने महादेव से गुहार लगाई कि वृद्धावस्था में वह दर्शन के लिए ओंकारेश्वर नहीं आ पा रहा हैं, तो वो महादेव का पूजन कैसे कर पाएगा।
स्वप्न में बताए स्थान पर मिला शिवलिंग
गोस्वामी ने बताया कि जब शिवभक्त ने महादेव से गुहार लगाई तो महादेव ने गुहार सुन ली। भोलेशंकर ने स्वप्न में भक्त को दर्शन दिए। साथ ही कहा कि प्रात: नदी (प्राचीन नाम चंद्रभागा नदी वर्तमान नाम चीलर नदी) में स्नान करना और जितनी दूरी तक पैदल चल सको, वहां शिवलिंग की स्थापना कर देना। स्वप्न में भगवान का आदेश प्राप्त कर शिवभक्त ने ब्रह्म मुहूर्त में नदी पर पहुंचकर स्नान किया। जैसे ही उन्होंने पानी में डुबकी लगाई तो उनके हाथ में शिवलिंग आ गया। इस शिवलिंग को हाथ में लेकर शिवभक्त ने कुछ दूरी पर ले जाकर उसे विधि-विधान से स्थापित कर दिया। तभी से यहां पर ओंकारेश्वर महादेव की स्थापना हुई।
ज्योतिर्लिंग की तरह ही है शिवलिंग
गोस्वामी के अनुसार धानमंडी क्षेत्र में स्थित ओंकारेश्वर महादेव के मंदिर में विराजित शिवलिंग ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से पूरी तरह एक समान दिखाई देता है। जैसे वहां की स्थिति रहती है उसी तरह की स्थिति यहां पर शिवलिंग की रहती है। दोनों स्थानों पर दर्शन करने वाले भी इसका प्रमाण स्वयं देते हैं।
खुद दर्शन देने आए ओंकार महाराज
यहां के पुजारी एक कहानी बताते हैं। प्राचीन काल में शाजापुर में एक शिव भक्त रहता था। वो हर सोमवार को घोड़े पर सवार होकर ओंकारेश्वर दर्शन करने जाता था। उन दिनों परिवहन के साधन नहीं थे। कई वर्षों बीतने के बाद भी नियम नहीं टूटा। वृद्धावस्था में भी नियम नहीं टूटने दिया, लेकिन कुछ समय बाद वे बीमार हो गए और नियम टूटने लगा। वे ओंकारेश्वर नहीं जा पाए। इसकी वजह से वे बहुत दुखी होने लगे। दिन-रात भगवान ओंकारेश्वर का चिंतन-मनन करने लगे और प्रार्थना करने लगे। एक दिन भगवान ओंकारेश्वर स्वप्न में आए और कहा कि सुबह नदी में स्नान करना मेरे दर्शन हो जाएंगे और नदी से जो भी पत्थर हाथ में आए उसे निकालना और जहां कदम रुक जाए, वहां स्थापित कर देना। भक्त ने अगले दिन वैसा ही किया। भक्त चीलर नदी में स्नान करने लगा और उसके बाद पत्थर उठाया और इसे लेकर वे बाहर आए और कुछ ही दूरी पर चलने के बाद रुक गए। इसके बाद यहीं चीलर नदी के किनारे ओंकारेश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई। तभी से लोग इसे भी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मानते हैं।
Updated on:
19 Jul 2022 11:59 am
Published on:
19 Jul 2022 11:54 am
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