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यहां रखी है भारतीय संविधान की मूल प्रति, जल्द ही देख पाएंगे लोग

constitution-सभी लोग देख सकें और हमेशा सुरक्षित रहे, ऐसी योजना पर चल रहा काम...

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पीयूष भावसार

शाजापुर। गणतंत्र दिवस मनाने के पहले देश का संविधान लिखा गया। संविधान की हस्तलिखित (अंग्रेजी भाषा में) मूलप्रति शाजापुर के शासकीय ग्रंथालय में सहेज कर रखी हुई है। सभी इसे देख सकें इसलिए योजना पर काम किया जा रहा है। जल्द ही संविधान की मूल प्रति सभी लोग देख सकेंगे।

किला परिसर में स्थित शासकीय ग्रंथालय की स्थापना 1981 में हुई थी। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा यहां पर संविधान की मूलप्रति उपलब्ध कराई गई। फलालेन के कपड़े में लपेट कर फिनाइल की गोलियों के साथ इसे सुरक्षित रखा हुआ है। हालांकि अभी इसे खुले में नहीं रखा जा सकता। इसके लिए अब कांच का बॉक्स तैयार कराया जा रहा है। इस बॉक्स में इसे रखा जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि लोग इसे देख सकेंगे। साथ ही यह सुरक्षित भी रहेगी। प्रदेश के इंदौर व ग्वालियर की तरह ही शाजापुर के शासकीय ग्रंथालय में यह मूलप्रति रखी हुई है।

उपेक्षा का शिकार हो रहे ग्रंथालय में दीमक की परेशानी को देखते हुए पत्रिका ने खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशन के बाद कलेक्टर दिनेश जैन ने शासकीय जिला ग्रंथालय का निरीक्षण किया था। इस दौरान समस्याओं का निराकरण करने के लिए संबंधितों को निर्देश दिए थे। वहीं संविधान की मूलप्रति को भी देखा था। संविधान की मूलप्रति को पूर्ण रूप से सहेजकर रखने पर कलेक्टर ने स्टॉफ की सराहना की थी।

लेदर कवर के साथ गोल्डन पेज लाइन वाली संविधान हस्तलिखित अंग्रेजी की मूलप्रति का वजन 3.75 किलो है। लंबाई 22 इंच और चौड़ाई 16 इंच है। इसके साथ ही गोल्डन कारीगरी भी है। कई पेज पर भगवान शंकर, भगवान श्रीराम, लक्ष्मणजी, माता सीता, हनुमानजी, भगवान श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी सहित भारत की प्राचीन सभ्यता के चित्र अंकित हैं। सबसे खास बात यह है कि मूलप्रति के सबसे अंतिम पेजों पर निर्माण करने वाली समिति के सभी सदस्यों के मूल हस्ताक्षर भी अंकित हैं। सबसे प्रथम हस्ताक्षर डॉ. राजेंद्र प्रसाद के हैं।

संरक्षण योजना पर हो रहा है काम

शासकीय जिला ग्रंथालय में अंग्रेजी भाषा में हस्तलिखित भारतीय संविधान की मूलप्रति रखी है। इसको सभी लोग देख सके और ये हमेशा सुरक्षित रहे इसके लिए योजना पर काम किया जा रहा है।

-विवेक दुबे, जिला शिक्षा अधिकारी, शाजापुर