
आज 75वां गणतंत्र दिवस है। संविधान लागू होने के इस दिन को प्रतिवर्ष उत्साह, उल्लास व उमंग के साथ मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस मनाने के पहले देश का संविधान लिखा गया। भारतीय संविधान की हस्तलिखित (अंग्रेजी भाषा में) मूलप्रति शाजापुर के शासकीय ग्रंथालय में सहेज कर रखी हुई है। इस सभी लोग देख सकें इसलिए अब इसे एक्रेलिक बॉक्स में फलालेन के कपड़े के साथ दीमक से सुरक्षा के लिए विशेष कीटनाशक के साथ रखा गया है, ताकि उक्त प्रति खराब नहीं हो।
किला परिसर में स्थित शासकीय ग्रंथालय की स्थापना 1981 में हुई थी। इसके साथ ही भारत सरकार ने यहां पर संविधान की मूलप्रति उपलब्ध कराई थी। यह आज भी सहेज कर रखी है। पूर्व में इसे फलालेन के कपड़े में लपेट कर फिनाइल की गोलियों के साथ सुरक्षित रखा था। अब इसे और संरक्षित करते हुए एक्रेलिक के बॉक्स में रखा है। बॉक्स में रखी मूल प्रति को अब सभी लोग आसानी से देख सकेंगे। साथ ही यह सुरक्षित भी रहेगी। इंदौर और ग्वालियर की तरह ही शाजापुर के शासकीय ग्रंथालय में मूलप्रति उपलब्ध है। संविधान की मूलप्रति को जिला शिक्षा अधिकारी विवेक दुबे के निर्देश पर प्रभारी ग्रंथपाल प्रमोद वैद्य, अजय सिंह, राजाबाबू योगी संरक्षित रखे हैं।
.3.75 किलो है वजन
लेदर कवर के साथ गोल्डन पेज लाइन वाली संविधान हस्तलिखित अंग्रेजी भाषा की मूलप्रति का वजन 3.75 किलो है। लंबाई 22 इंच और चौड़ाई 16 इंच है। गोल्डन कारीगरी भी है। कई पेज पर भगवान शंकर, भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमानजी, भगवान श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी सहित भारत की प्राचीन सभ्यता के चित्र अंकित हैं। खास बात यह है कि यहां पर रखी मूलप्रति के सबसे अंतिम पेजों पर निर्माण करने वाली समिति सदस्यों के मूल हस्ताक्षर भी अंकित हैं। सबसे प्रथम हस्ताक्षर डॉ. राजेंद्रप्रसाद के हैं।
सुरक्षित रखी है मूल प्रतिशासकीय जिला ग्रंथालय में अंग्रेजी में हस्तलिखित भारतीय संविधान की मूलप्रति रखी है। इसको सभी लोग देख सकें और हमेशा सुरक्षित रहे इसके लिए एक्रेलिक के बॉक्स में फलालेन के कपड़े के साथ दीमक से सुरक्षा की विशेष दवाई डालकर रखा है।
-विवेक दुबे, जिला शिक्षा अधिकारी-शाजापुर
Updated on:
26 Jan 2024 02:39 pm
Published on:
26 Jan 2024 02:37 pm
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