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सावन सोमवार विशेष :  उज्जैन के अलावा और कहां होती बाबा महाकाल की भस्मारती, पढिय़ें

वैसे तो उज्जैन में स्थित बाबा महाकाल की प्रतिदिन भस्म आरती होती है। संभवत: ये एक अनोखा ही मंदिर पूरे विश्व में है जहां पर बाबा महाकाल की भस्म से आरती कर शृंगार किया जाता है, लेकिन इस मंदिर का एक छोटा प्रतिबिंब शाजापुर जिले के ग्राम सुंदरसी में है। यहां पर हर साल सावन माह में प्रतिदिन महाकाल की भस्म से आरती की जाती है। करीब 2 हजार साल से ये परंपरा सतत निभाई जा रही है।

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Shajapur Desk

Jul 23, 2017

Savan Monday Special: Apart from Ujjain, where els

Savan Monday Special: Apart from Ujjain, where else will Baba Mahakal

उज्जैन. वैसे तो उज्जैन में स्थित बाबा महाकाल की प्रतिदिन भस्म आरती होती है। संभवत: ये एक अनोखा ही मंदिर पूरे विश्व में है जहां पर बाबा महाकाल की भस्म से आरती कर शृंगार किया जाता है, लेकिन इस मंदिर का एक छोटा प्रतिबिंब शाजापुर जिले के ग्राम सुंदरसी में है। यहां पर हर साल सावन माह में प्रतिदिन महाकाल की भस्म से आरती की जाती है। करीब 2 हजार साल से ये परंपरा सतत निभाई जा रही है।
12 ज्योर्तिलिंगों में से एक उज्जैन के प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर का एक और मंदिर राजा विक्रमादित्य ने शाजापुर जिले के ग्राम सुंदरसी में भी बनाया था। दो हजार से अधिक वर्ष पुराने इस मंदिर की व उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर की बनावट हुबहू है। जो उज्जैन और सुंदरसी के अलावा कहीं नहीं है। कहा जाता है कि यहां पर भी महाकाल के दर्शन और पूजन करने पर वो ही फल मिलता है जो कि उज्जैन के महाकाल के दर्शन और पूजन से मिलता है। उज्जैन महांकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्माआरती यहां श्रावण मास में प्रतिदिन होती है। मंदिर पुजारी बताते है कि श्रावण मास के शुरुआती दौर से ही यहां शिवलिंग का प्रति सोमवार को श्रंृगार एवं प्रतिदिन सुबह भस्म आरती की जाती है। पूराने लोगों के अनुसार पूर्व में यहां पर भी सावन माह में मुर्दे की राख से भस्म आरती की जाती थी। हालांकि अब गाय के गोबर से बने कंडे की राख चढ़ाई जाती है।
बहन के लिए कराया था राजा ने मंदिर निर्माण
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मान्यताओं के अनुसार राजा विक्रमादित्य की बहन सुंदरबाई का विवाह सुंदरगढ़ (सुंदरसी का प्राचीन नाम) में होने वाला था। तब बहन ने राजा से कहा था कि मैं उस गांव में विवाह करूंगी जहां भगवान महाकाल हो। क्योंकि वो प्रतिदिन बाबा महाकाल के दर्शन के बाद ही अन्न जल-ग्रहण करती थी। इस पर राजा ने इस सुंदरगढ़ में भगवान महाकाल के शिवलिंग की स्थापना की और उज्जैन में बने महाकाल मंदिर का छोटा स्वरूप गांव में बनवाया। तभी से यहां उज्जैन महाकाल मंदिर की तरह पूजा-अर्चना का दौर जारी है। पूर्व विधायक एवं मंदिर समिति के लक्ष्मणसिंह डोडिया ने बताया कि कालांतर में इस मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार किया गया और बाद में इसका जीर्णोद्धार स्वामी परमानंदजी सरस्वती ने कराया। लगभग दो हैक्टेयर क्षेत्र में फैले इस मंदिर में कई ऐसे पुराने अवशेष भी है जो इस क्षेत्र को प्राचीन समय में बहुत बड़ा नगर होना प्रतीत करता है।
मां हरसिद्धी की भी प्रतिमा है मंदिर परिसर में
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सुंदरसी स्थित महाकाल मंदिर में मां हरसिद्धी की प्रतिमा की स्थापना भी राजा विक्रमादित्य ने कराई थी। तभी से यहां पर उज्जैन के मां हरसिद्धी मंदिर की तर्ज पर माता का पूजन किया जाता है। इसके साथ ही महाकाल मंदिर परिसर में 6 प्राचीन मंदिर है। राजा विक्रमादित्य की बहन सुंदरबाई का विवाह यहां होने के बाद ही इस गांव का नाम सुंदरसी रखा गया है। मंदिर का संचालन यहां स्थानीय स्तर पर बनाई गई समिति द्वारा ही किया जाता है। वैसे मंदिर की व्यवस्था एवं पूजा-अर्चना का कार्य पपू हरिकृष्ण शरण 'बापूजीÓ संभालते है।
क्षिप्रा के जल से होता था अभिषेक
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प्राचीन परंपराओं के अनुसार ग्रामवासी बताते है कि मंदिर के शिवलिंग के पास एक प्राचीन कुंड बना हुआ है। जहां पौराणिक काल में सुरंग के माध्यम से उज्जैन स्थित मां क्षिप्रा का जल आता था। इसी जल से बाबा महाकाल का अभिषेक किया जाता था। हांलाकि वर्तमान में क्षिप्रा के जल के यहां आने का मार्ग अवरूद्ध हो गया है। फिर भी ग्रामीण इस कुंड के जल को मां क्षिप्रा के जल के समान ही महत्व देते हैं।