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शाजापुर. परिवार कल्याण वर्ष २०१८-१९ के तहत शाजापुर जिले को 8 हजार 200 नसबंदी का लक्ष्य मिला है, लेकिन लाख कोशिश के बावजूद दिसंबर माह तक ९ माह में 2679 ऑपरेशन ही हो सके। ९ माह बीतने के बाद भी विभाग लक्ष्य के आधे लोगों की भी नसंबदी नहीं कर पाया है। समय सीमा खत्म होने में महज ३ माह बाकी हैं। ऐसे में शेष 5 हजार 521 ऑपरेशन कैसे होंगे, इस बात का जवाब तो खुद स्वास्थ्य विभाग के पास भी नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग प्रति प्रति शनिवार को जिला अस्पताल में नसबंदी कैंप का आयोजन भी कर रहा है, लेकिन इन शिविरों में नसबंदी के लिए आने वाली महिलाओं को विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कभी डॉक्टर देरी से पहुुंचते हैं, तो कभी डॉक्टर पहुंचते ही नहीं है। कभी लक्ष्य दंपतियों को बिछाने व ओढऩे के लिए बिस्तर नहीं मिलते। यहां तक की उन्हें जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। यह ऑपरेशन के बाद उन्हें बाहर भेज दिया जाता कुछ महिलाएं ऐसी हंै, जो ऑपरेशन के लिए दूर-दराज गांव से आती हैं, ऐसे में उनकी फजीहत हो जाती है। लेकिन इन अव्यवस्थाओं पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। शनिवार को भी इसी नसबंदी कराने आई महिलाएं बाहर बैठी रहीं।
जनसंख्या के मान से नसबंदी के लक्ष्य
शासन ने वर्ष २०१९-१९ के लिए प्रदेश के सभी जिलों को जनसंख्या के मान से नसबंदी ऑपरेशन के लक्ष्य दिए हैं। शाजापुर स्वास्थ्य विभाग को भी 31 मार्च 2019 तक8200 नसबंदी ऑपरेशन पूरा करने का लक्ष्य मिला है, लेकिन अब तक विभाग मात्र 2679 ऑपरेशन ही कर पाया है। लक्ष्यपूर्ति की निर्धारित समयसीमा खत्म होने का समय ३१ मार्च २०१९ अंतिम दिन है। ऐसे में शेष तीन माह में किसी भी हाल में विभाग को5 हजार 529 नसबंदी ऑपरेशन करना होंगे, जो मुश्किल ही नहीं नामुमकीन से लग रहे हैं।
चार केंद्र लक्ष्य से काफी दूर
नसबंदी ऑपरेशन लक्ष्य पूरा करने में शुजालपुर केंद्र लक्ष्य से आगे निकल गया है। यहां दिए गए लक्ष्य के अनुरूप १११ प्रतिशत नसंबदी की गई है। वहीं दूसरे नंबर पर शाजापुर केंद्र रहा यहां ९३.६५ प्रतिशत नसबंदी ऑपरेशन हो चुके है। लेकिन कालापीपल, मो. बड़ोदिया, पोलायकला और बेरछा की स्तिथि काफी खराब है। कालापीपल में २३.४९, मो. बड़ोदिया में ३२ प्रतिशत, पोलायकलां में १२.७९ प्रतिशत और बेरछा में १७.९० प्रतिशत ही लक्ष्य की पूर्ति की गई है। लक्ष्य पूर्ति में ये चार केंद्र काफी कमजोर रहे हैं।
पुरुषों में नसबंदी को लेकर जागरुकता नहीं
नसबंदी के मामले में महिलाएं आगे हैं, महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की नसबंदी नाममात्र है। इसका सीधा उदाहरण यहीं देखने को मिलता है कि अप्रैल से दिसंबर तक 2679 नसबंदी ऑपरेशन हुए हैं। इनमें से महिलाओं के 2625 ऑपरेशन हुए हैं, वहीं मात्र 54 पुरुषों ने नसबंदी कराई हैं। पुरुष नसबंदी शिविरों में भी पुरुषों की अनुपस्थित के चलते महिलाओं की नसबंदी की जाती है।
नसबंदी को लेकर अभी लोगों में जागरुकता की कमी है। लोगों को हितग्राही सेवक योजना बनाकर नसबंदी के लिए कहा जाता है। विभाग की पूरी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा नसबंदी कराई जाए। जहां अव्यवस्थाएं हैं वहां सुधार किया जाएगा।
डॉ. जीएल सोढ़ी, सीएमएचओ
Published on:
06 Jan 2019 09:00 am
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