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सावधान: अस्पताल पहुंचा सकता है इस टंकी का पानी

परिसर स्थित कुएं के पानी में पाई बैक्टीरिया, जल परीक्षण प्रयोगशाला में हुए परीक्षण में खुलासा

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शाजापुर. इन दिनों जिला अस्पताल का कायाकल्प किया जा रहा है।अस्पताल के कायाकल्प को लेकर प्रशासन भी गंभीरता दिखा रहा है। लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों, अटेंडरों और स्टॉफ को जो पानी उपलब्ध हो रहा है वह पानी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में अस्पताल का पानी पीने से भी लोगों की सेहत पर विपरित असर पड़ रहा है।


शाजापुर जिला अस्पताल में एक कुआ मौजूद है। इसी कुएं से अस्पताल में लगी टंकियों में सीधे पाइप लाइन से पानी सप्लाय किया जाता है। जिसका पानी नलों व वाटर कूलर के माध्यम से मरीजों और अटेंडरों तक पहुंचता हैं। जो इसका सेवन करते हैं। इस पानी में बैक्टीरिया मौजूद हैं, जिसे सप्लाय के पहले ब्लीचिंग पाउडर डालकर क्लोरीनिशन करना जरूरी है।

व्यवस्था पर ध्यान , सुरक्षा पर नहीं
जिला अस्पताल में पुरानी पानी की टंकी जर्जर होने से अस्पताल की छत पर अलग-अलग हिस्सों से सिन्टेक्स की टंकियां लगी हुई हैं। जिनसे पानी सप्लाय किया जा रहा है। लेकिन अब सीएमएचओ ऑफिस के पास बड़ी पानी की टंकी बनकर तैयार हो गई है। इससे अस्पताल की पाइन लाइन को जोड़कर एक ही टंकी से पानी सप्लाय किए जाने की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन अस्पताल में जो पानी मरीजों को दिया जा रहा है, उसमें भारी मात्रा में बैक्टीरिया पाया गया है। ऐसे में ये पानी पीने योग्य नहीं है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ब्लीचिंग पाउडर कुए में डाला गया था, अगर समय पर और पानी मात्रानुसार ब्लीचिंग पाउडर डाला गया होता तो जांच में पानी में बैक्टीरिया नहीं मिलते।

नहीं होती हर माह पानी की जांच
जिला अस्पताल में सप्लाय किए जाने वाले पानी की जांच हर माह की जाना जरूरी है। जिससे पानी वास्तवित स्थिति का पता लगाया जा सके। लेकिन अस्पतला प्रशासन ने द्वारा पानी की जांच कराए हुए तीन माह बीत चुके हैं। लेकिन दोबारा जांच नहीं कराई गई।

दस्त और इंफेक्शन होने का खतरा
जिला अस्पताल में चिकित्सक डॉ. आलोक सक्सेना के मुताबिक दस्त, इंफेक्शन, टाईफाइडट सहित पेट संबंधी अनेक समस्याएं बैक्टिरियायुक्त पानी पीने से हो सकती हैं। ऐसे पानी का सेवन पानी को उबालकर किया जा सकता है।

जिला अस्पताल के पानी की जांच कराई जाती है, जांच में कुएं के पानी में बैक्टीरिया पाए गए हैं। कुएं में ब्लीचिंग पाउडर डाला गया है। हर माह पानी की जांच कराई जाएगी।
एसडी जायसवाल, सिविल सर्जन