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lockdown-3 फुटपाथ पर सोने काे मजबूर हुए प्रवासी मजदूर, पैदल ही लौट रहे घर

Highlights अब टूटने लगा सब्र का बांध, पैदल ही निकल रहे मजदूर लंबे सफर के बाद सड़क पर साेने काे मजूबर हैं मजदूर

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कोरोना

lockdown-3 फुटपाथ पर सोने काे मजबूर हुए प्रवासी मजदूर, पैदल ही लौट रहे घर

सहारनपुर।

तेरा काेई साथ ना दे ताे, तू गम से प्रीत जाेड़ ले

बिछोना धरती काे कर ले, अरे आकाश ओढ़ ले

लॉक डाउन में प्रवासी मजदूरों की हालत भी कुछ ऐसी ही है। अलग-अलग राज्यों से लाैट रहे प्रवासी मजदूर पैदल और साइकल से सैकड़ों किलोमीटर सफर कर रहे हैं और फिर रास्ते में सड़क पर ही साे रहे हैं।

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पूरे देश में कोरोनावायरस महामारी तेजी से अपने पैर पसार रही है। इसको लेकर शासन व प्रशासन ने युद्ध स्तर पर तैयारी की है। देशभर में लोक डाउन 3.0 चल रहा है। प्रशासन लगातार लोगों से घरों में रहने की अपील कर रहा है लेकिन एक बड़ी तादाद में मजदूर तबका यूपी के बाहर मेहनत मजदूरी करता है। लॉक डाउन में इनके पास खाने-पीने तक की समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसे में दूसरे प्रदेश में फंसे प्रवासी प्रदेश सरकार से घर वापसी की गुहार लगा रहे हैं।

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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अन्य राज्यों में फंसे यूपी के प्रवासियों को वापस लाने की कवायद शुरू कर दी है। हजारों की संख्या में अन्य राज्यों में फसे प्रवासियों को बसों व ट्रेनों से उनके गृह जनपद लाया जा रहा है। शामली के हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते प्रवासी मजदूर पैदल चलकर ही अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। शामली प्रशासन ने ना तो उनके रहने की कोई व्यवस्था कराई और ना ही इनके यूपी में आने के बाद इनकी कोई जांच की गई है।

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आलम यह है कि दर्जनों प्रवासी मजदूर सड़कों पर रात के अंधेरे में समय बिताने को मजबूर हैं। प्रवासी मजदूर हरियाणा राज्य से चलकर यूपी के अलग-अलग जिलों में पैदल ही जा रहे हैं। यह तस्वीर शामली जनपद के कांधला थाना क्षेत्र की है। यहां दर्जनों प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जा रहे हैं। रात हो जाने पर वह लोग सड़क के किनारे पर ही लेट गए। जब हमने प्रवासियों से बात की तो उनका कहना है कि ना तो किसी प्रशासन के अधिकारी ने उनकी सुध ली है और ना ही उन्हें खाने की कोई व्यवस्था कराई गई है। मौसम खराब हो रहा है और यह लोग फुटपाथ पर लेट कर रात बिता रहे हैं। सवाल यही है कि क्या शामली प्रशासन पर सीएम के निर्देशों का कोई असर नहीं है। जानबूझकर शामली प्रशासन अनजान बना हुआ है।