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70 साल पुराने मेले पर संकट के बादल, मेला लगने की संभावना नगण्य

श्योपुर की पहचान श्री हजारेश्वर मेला पहली बार अधर में, लॉकडाउन 3 मई तक, लेकिन उसके बाद भी मेला लगने पर असमंजस

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70 साल पुराने मेले पर संकट के बादल, मेला लगने की संभावना नगण्य

70 साल पुराने मेले पर संकट के बादल, मेला लगने की संभावना नगण्य

श्योपुर,
श्योपुर की सांस्कृतिक पहचान बन चुके श्री हजारेश्वर मेले पर इस बार संकट के बादल हैं। कोरोना संक्रमण को रोकने लगाए गए लॉकडाउन से इस बार मेला लगने की स्थिति नगण्य सी है। ऐसा इसलिए क्योंकि देशव्यापी लॉकडाउन 3 मई तक है और यदि लॉकडाउन खुलता भी है तो भी उसके बाद भीड़भाड़ वाले आयोजनों पर पाबंदी रहना तय है। यदि ऐसा हुआ तो 70 साल में पहली बार हजारेश्वर मेला नहीं लगेगा।


हालांकि कोरोना का संकट आने से पहले और लॉकडाउन प्रारंभ होने से पहले श्योपुर नगरपालिका प्रशासन ने श्री हजारेश्वर मेलेे के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन लॉकडाउन के बाद ये प्रक्रिया थम गई। चूंकि ये मेला अप्रैल-मई में ही लगता है, लेकिन इस बार लॉकडाउन का ग्रहण इस मेले पर छा गया है। यही वजह है कि लॉकडाउन में अप्रैल माह तो पूरा निकल गया और 3 मई बाद भी सार्वजनिक और धार्मिक आयोजनों के साथ ही भीड़ वाले आयोजनों पर पाबंदी रहेगी। ऐसे में मई माह भी निकल जाएगा और जून माह में बारिश का सीजन शुरू हो जाता है। सीएमओ नपा आनंद शर्मा भी कहते हैं कि अभी तो लॉकडाउन है, उसके बाद क्या स्थिति बनती है, वो देखा जाएगा, लेकिन मेला लगने की संभावना कम ही है।


पशु मेले के रूप में हुई थी शुरुआत
शहर के श्री हजारेश्वर मेला मैदान में 70 साल पूर्व इस मेले की शुरुआत पशु मेले के रूप में हुई थी। संत जसराम बाबा ने 70 साल पूर्व एक पशु मेले के रूप में मेले की आधारशिला रखी थी, लेकिन इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और ये सांस्कृतिक मेला हो गया। यही वजह रही कि 50 साल पहले नगरपालिका ने इसका आयोजन अपने हाथ में ले लिया। तभी से हर साल अप्रैल-मई में नपा मेले का आयोजन करती है।


एक माह रहती है चकाचौंध
श्री हजारेश्वर मेले का आयोजन पूरे एक माह के लिए होता है। जिसमें झूला, चकरी, ड्रेगन टे्रन, मौत का कुआं आदि मनोरंजक साधनों के साथ खरीदारी और खानपान के सेक्टर रहते हैं। वहीं आर्केस्ट्रा, कवि सम्मेलन, भजन संध्या, कब्बाली, मुशायरा जैसे मंचीय आयोजन भी होते हैं। यही वजह है कि इस मेले का इंतजार न केवल शहरवासी बल्कि जिले और राजस्थान के लोग वर्ष भर करते हैं।