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उधारी के चारे से पल रहे पशु, गौशाला समिति के सामने आर्थिक संकट

- जिले की बरगवां गौशाला में भूख से बिलख रहा निराश्रित गौवंश- अनुदान की राशि खत्म होने से बढ़ा चारे का संकट

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उधारी के चारे से पल रहे पशु, गौशाला समिति के सामने आर्थिक संकट

उधारी के चारे से पल रहे पशु, गौशाला समिति के सामने आर्थिक संकट

श्योपुर
जिले में 16 ग्राम पंचायतों में गौशाला का निर्माण होना था। इनमें से दो बनकर तैयार हुई और एक में गौवंश को रखकर उनकी देखभाल शुरू कर दी गई, लेकिन अनुदान की राशि खत्म होने से गौशाला की जिम्मेदारी निभाने वाले स्वसहायता समूह के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। ऐसे में समूह को उधारी के चारे से गौवंश को पालना पड़ रहा है। समय पर चारा नहीं मिलने से गौवंश भूख से बिलख रहा है। गौशाला में गौवंश रखने की क्षमता 100 है। एनआरएलएम के गणेश स्वसहायता समूह को गौशाला की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। संभाग की यह दूसरी गौशाला थी जो जल्द तैयार हुई और इसका उद्घाटन जिले के प्रभारी व पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने किया था, लेकिन आज यही गौशाला अव्यवस्था का शिकार है।

बरगवां में 35 लाख की लागत से गौशाला का निर्माण किया गया था। बीते 6 दिसंबर को इसका शुभारंभ हुआ। लेकिन दो माह ही गौशाला पर बजट का संकट आ गया। एनआरएलएम के बरगवां गणेश स्वसहायता समूह को गौशाला की जिम्मेदारी देने के साथ ही 50 हजार का अनुदान दिया गया। इसमें से समूह ने 32 हजार रुपए में धान, मक्का, बाजरा एव जंगली घास खरीद लिया। बची हुई राशि से अन्य काम करा लिए गए। अब समूह के सामने बजट न होने से आर्थिक संकट गहरा गया है। गणेश स्वसहायता समूह की महिला अध्यक्ष सुनीता प्रजापति का कहना है कि अब उधार लेकर घास खरीदकर गायों को चारा खिला रहे हैं। सुबह 9 बजे और शाम को 4 बजे दो समय 100 गायों को 25 से 30 घास के पूरा डालते हैं। गौशाला में निराश्रित गायों का दशा खराब हो रही है।
दिसम्बर माह में मिले थे 50 हजार
बरगवां गौशाला के लिए दिसम्बर माह में गणेश स्वसहायता समूह को 50 हजार मिले थे। समूह की अध्यक्ष सुनीता प्रजापति का कहना है कि इस राशि में से 32 हजार का घास खरीद लिया है। शेष 28 हजार में पानी के खेर का मेंटिनेंस और गोबर हटाने के लिए तसल्ल, फावड़ा केंचुआ कम्पोजस्ट चारागाह निर्माण में राशि खर्च हो गई। ऐसे में एक सैंकडा गायों को 32 हजार का घास दो महीने में खिला दी। अब उधार लेकर गायों के चारे की व्यवस्था कर रहे हैं।
जिले में बननी थीं 16 गौशाला
जिले में 16 गौशाला बनना थीं। लेकिन अभी तक सिर्फ दो का निर्माण हो सका है। 16 गौशाला में 1600 गौवंश रखने की व्यवस्था है। जबकि जिले में 16 हजार 500 निराश्रित गौवंश सडक़ पर घूम रहा है। ऐसे में इन गौशालाओं के बनने के बाद भी 14 हजार 900 गौवंश सडक़ों पर ही घूमेगा। गौशाला बनने के बाद भी आवारा गौवंश की समस्या खत्म नहीं होगी। बरगवां गौशाला बनकर तैयार होने के बाद गौवंश रखा गया, लेकिन यहां बजट का संकट खड़ा होने से गौवंश की स्थिति सुधरने की बजाय बिगडऩे लगी है।
फैक्ट फाइल
16500 जिले में कुल निराश्रित गौवंश
16 जिले में स्वीकृत गौशाला
100-100 गौवंश रखने की क्षमता गौशालाओं में
14900 गौवंश गौशाला बनने के बाद भी सडक़ पर रहेगा
2 गौशाला बनकर तैयार
1 बरगवां गौशाला में गौवंश को चारे का संकट

वर्जन
हमें जितना बजट मिला था। अब वह खत्म हो गया है। पैसा उधार लेकर चारे की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन 100 गायों के लिए चारा पर्याप्त नहीं हो पा रहा है।
सुनीता प्रजापति
अध्यक्ष, गणेश स्वसहायता समूह बरगवां