
दस साल में घटे मधुमक्खियों के छत्ते, गिरा शहद का उत्पादन
कराहल । वनोपज के परिपूर्ण कराहल के जंगलों में अब शहद का उत्पादन लगातार गिर रहा है। ये हम नहीं कर रहे बल्कि मध्यप्रदेश विज्ञान सभा की एक टीम द्वारा किए गए सर्वे में स्थितियां सामने आई है। टीम द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया है कि विगत 10 सालों में कराहल के पहाड़ी वाले जंगलों में मधुमक्खियों के छत्तों की संख्या कई गुना तक घटी है। पिछले वर्षों में अल्पवर्षा के कारण ये स्थिति बनी है, लेकिन जिससे मधुमक्खियां अन्य क्षेत्रों में पलायन कर गई हैं।
सोमवार को भी टीम के सदस्यों ने कराहल क्षेत्र की पहाडिय़ों की खोह में सर्वे किया। मध्य प्रदेश जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रायोजित मध्यप्रदेश विज्ञान सभा की टीम द्वारा कराहल में पिछले एक साल से तीनों मौसमों में मधुमक्खियों एवं शहद उत्पादन का सर्वे किया गया है। सर्वे में पाया गया है कि क्षेत्र में मधुमक्खियां विगत 10 वर्ष पूर्व की अपेक्षा इस वर्ष काफी कम मात्रा में रह गई हैं। यही वजह है कि जिन खोह में 250-300 छत्ते लगा करते थे, उनमें वर्तमान में महज 10-15 छत्ते ही लगे हुए हैं। संख्या कम होने का कारण अल्पवर्षा के कारण जंगल में फूल, फल व पत्तियों कम होने की वजह से मधुमक्खियां अन्य क्षेत्रों में पलायन कर रही हैं।
भोपाल के विशेषज्ञों ने किया सर्वे
कराहल ब्लॉक के जंगलों में शहद बाहुल्य इलाकों में वर्तमान में विज्ञान सभा भोपाल के विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है। सीनियर साइंटिस्ट डॉ. उमाशंकर शर्मा, जूनियर साइंटिस्ट रंजन कुमार के साथ कराहल विज्ञान सभा प्रभारी वीरेंद्र पाराशर द्वारा ग्राम ऊपरीखोरी के जंगल मे लैचौरा खोह, पनहा खोह, झल्लाद खोह, देव खोह, भौर खोह में शहद संग्राहकों की टीम के साथ सर्वे कार्य किया जा रहा है। संग्राहकों का कहना है कि आने वाले एक माह में बारिश के बाद और स्थिति क्लीयर होगी कि कितने छत्ते लगते हैं। इस संबंध में डॉ.शर्मा का कहना है कि मधुमक्खियों के पलायन करने का मूल कारण जलवायु परिवर्तन है। 10 साल पूर्व नियमित अंतराल पर बारिश होती थी, जिससे जंगलों में भी फूल पत्तियां बनी रहती थी, लिहाजा मधुमक्खियां एक ही स्थान पर छत्ते लगाती थी।
मधुमक्खी की प्रजाति की भी हो रही पहचान
सर्वे के दौरान टीम द्वारा मधुमक्खियों की प्रजातियों की भी पहचान की जा रही है। इसी के तहत वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। ताकि प्रजातियों की जानकारी एकत्रित की जा सकती है। विज्ञान सभा कराहल शाखा के प्रभारी वीरेंद्र पाराशर ने बताया कि कराहल के जंगलो में सतगवभा मधुमक्खी भी पाई जाती है। जिसको स्थानीय भाषा में सोना या मेहरा मधुमक्खी भी कहते है। मधुमक्खी में ये विशेष प्रजाति होती है।
Published on:
03 Jul 2018 02:54 pm
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