
ऐलान तो हुआ लेकिन अभी तक नहीं मिली जमीन,खुद के हक के लिए परेशान हो रहे 100 बच्चे
श्योपुर । एक साथ स्वीकृत हुए और एक साथ राशि भी जारी हुई, लेकिन एक का निर्माण शुरू हो गया, लेकिन दूसरे को अभी जमीन ही नहीं मिल पाई है। कुछ यही स्थिति है कि शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में पढऩे वाले छात्र-छात्राओंं के लिए बनने 100-100 सीटर छात्रावासों की, जिसमें बालिका छात्रावास का तो निर्माण शुरू हो गया है, लेकिन बालक छात्रावास के लिए अभी तक जमीन ही नहीं मिल पाई है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएसएमए) के तहत 40 जिला मुख्यालयों शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में चालू वित्तीय वर्ष 2018 -19 में बालक-बालिकाओं के लिए 100-100 सीटर छात्रावास स्वीकृत किए गए। इसी के तहत श्योपुर के उत्कृष्ट विद्यालय के लिए भी छात्रावास मंजूर हुए, लेकिन यहां परिसर में जगह नहीं होने के कारण छात्रावास बाहर बनाने पड़ रहे हैं। यही वजह है कि जिला प्रशासन ने बालिका छात्रावास के लिए तो बायपास रोड पर जमीन आवंटित कर दी, जिसके बाद इसका काम भी शुरू हो गया है, लेकिन अब बालक छात्रावास को जगह नहीं मिल रही है, जिससे उसका काम लटक गया है।
बताया गया है कि बालक छात्रावास के लिए ढेंगदा में जमीन बताई गई है, लेकिन ये जमीन उत्कृष्ट विद्यालय से काफी दूर है, लिहाजा छात्रावास बनाना औचित्यहीन है। यही वजह है कि अब छात्रावास बनाने को नई जमीन नहीं मिल पा रही है। ऐसे में फिलहाल निर्माण अधर में लटका हुआ है।
साढ़े सात करोड़ से अधिक में बनेंगे दोनों छात्रावास
शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए बनाए जाने वाले बालक-बालिका छात्रावासों पर लगभग साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इनमें बालक छात्रावास 3 करोड़ 8 5 लाख और बालिका छात्रावास करीब 3 करोड़ 8 6 लाख रुपए में बनेंगे। बताया गया है कि निर्मित छात्रावास सर्वसुविधायुक्त होंगे। इनमें लायब्रेरी, कंप्यूटर लैब, ट्रेनिंग सेंटर और प्रसाधन-कक्ष होंगे। छात्रावासों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये उचित वातावरण मिल सके।
उत्कृष्ट में पढ़ते हैं डेढ़ हजार छात्र
जिला मुख्यालय स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में वर्तमान में कक्षा 9 से 12 तक लगभग डेढ़ हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें आधे से ज्यादा छात्र-छात्राएं ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं, जिन्हें जिला मुख्यालय पर रहने के लिए किराए से कमरा लेना पड़ता है। ऐसे में छात्रावास बनने के बाद बाहरी छात्र-छात्राओंं को काफी राहत मिलेगी।
Published on:
09 Feb 2019 08:12 am
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