
ठेकेदार की निजी परेशानी से काम ठप, शहर की सांसों में बीमारियां घोल रही धूल
श्योपुर । शहर के बायपास मार्ग का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। तीन किलोमीटर के अधूरे निर्माण से धूल के गुबार लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। हालात यह है कि घरों के दिन भर दरवाजे-खिडक़ी बंद होने के बाद भी धूल जम जाती है, जबकि धूल के उडऩे से लोगों में कई बीमारी भी उपज रही हैं, जिससे बचने के लिए घरों से निकलते समय अधिकतर लोग मुंह ढंककर निकल रहे हैं। बायपास मार्ग के रहवासियों और दुकानदारों का सडक़ पर उड़ते धूल के गुबार से जीना मुहाल हो गया है।
बायपास बनने के बाद भले ही लोगों को लाभ मिलेगा, लेकिन अभी बंद पड़े काम और उड़ते धूल के गुबार लोगों को अस्थमा का रोगी बनाने के साथ फेंफड़े कमजोर कर रहा है। लोगों का कहना है कि लम्बे अर्से से मार्ग बदहाल है। बावजूद इसके अफसर मौन बने हुए हैं। हाल में काम शुरू हुआ तो लगा कि अब धूल के गुबारों से छुटकारा मिलेगा, लेकिन काम फिर बंद हो गया।
धूल से यह हो रही बीमारी
साइनस, अस्थमा, एलर्जी, पथरी, त्वचा रोग, नेत्र रोग सहित अन्य रोगों से लोग पीडि़त हो रहे हैं। जबकि इन रोगों में डॉक्टरों द्वारा बचाव के लिए धूल से दूर रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन बायपास मार्ग को खोदकर छोड़ देने से लोग बीमारियों की चपेट में हैं वह बार-बार इलाज कराने पहुंच रहे हैं। धूल से बुजुर्ग तो परेशान हैं ही साथ ही युवा भी बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं।
तीन करोड़ की लागत से बनना है मार्ग
करीब तीन करोड़ की लागत से बनने वाले बायपास मार्ग का काम नगर पालिका द्वारा कराया जा रहा है। जो धीमी गति से शुरू हुए निर्माण कार्य के चलते अभी तक एक किमी तक भी नहीं बन सका है।
ब्लड में मिल सकती है यह धूल
हवा में जब धूल बढ़ जाती है तो यह सेहत के लिए सबसे खतरनाक होती है। दरअसल, शरीर को नुकसान वह धूलकण पहुंचाते हैं जो 10 माइक्रोन से छोटे होते हैं और हवा में घुल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। हवा के साथ-साथ ये कण रक्त में भी चले जाते हैं और विभिन्न अंगों तक पहुंच जाते हैं। धूल सभी के लिए नुकसानदेह है। शरीर में प्रवेश करने के बाद यह रक्त प्रवाह पर असर डालती है।
कोरोनरी धमनियों में हो सकती है रुकावट
एक्सपर्ट के तौर पर ग्वालियर के एलर्जी व टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ.मनीष शर्मा बताते हैं कि दिल, मधुमेह, अस्थमा और अन्य बीमारियों के रोगियों के लिए इस तरह का प्रदूषण जानलेवा हो सकता है। उन्हें कार्डियोवस्कुलर दौरे भी पड़ सकते हैं या कभी-कभी अंग फेल हो जाते हैं। कारण यह है कि धूल कण जब ऑक्सीजन के साथ रक्त कोशिकाओं में पहुंचते हैं तो ये उन्हें चिपचिपा कर देते हैं। इससे ब्लड में मौजूद प्लेटलेट्स आपस में चिपक जाते हैं और रक्त में जरूरत से ज्यादा थक्के बनने लगते हैं। यदि धूल भरे गुबार में ज्यादा समय तक रुकना पड़े तो यह कोरोनरी धमनियों में रुकावट पैदा कर सकती है।
यह बोले लोग
धूल मिट्टी ने जीना दुभर कर दिया है। घर में धूल जम जाती है। धूल के कारण एलर्जी हो रही है। सांस लेने में दिक्कत होती है।
दीपचंद मंूगिया, स्थानीय निवासी
दुकानदारी करना मुश्किल
बायपास मार्ग के अधूरे निर्माण से दुकानदारी करना मुश्किल हो गया है। काम ठप से हो गए हैं। धूल के कारण बीमारी अलग हो रही हैं।
विष्णु मित्तल, व्यवसायी
सांस लेने में दिक्कत
दिन भर दुकान पर बैठने के कारण मार्ग से उडऩे वाले धूल के गुबार बीमार कर रहे हैं। सांस लेने में दिक्कत होती है।
देवनारायण, दुकानदार
बीमार पड़ गया था मैं
बायपास मार्ग पर चाट ठेला लगाकर परिवार चलाता हूं। लेकिन यहां रोज खड़े रहकर धूल के कारण बीमार पड़ गया। एक माह बाद ठीक हो सका।
लोकेश प्रजापति, दुकानदार
Published on:
22 Jan 2019 08:22 am
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