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धोखाधड़ी का मामला दर्ज,फिर भी बनकर बैठे है डीईओ

-कांग्रेसी नेताओं ने प्रेस वार्ता कर जिला शिक्षा अधिकारी पर लगाए कई आरोप-निलंबन की मांग करते हुए कांग्रेसी नेता बोले-डीईओ की कार्यप्रणाली से धूमिल हो रही कांग्रेस सरकार की छवि

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धोखाधड़ी का मामला दर्ज,फिर भी बनकर बैठे है डीईओ

धोखाधड़ी का मामला दर्ज,फिर भी बनकर बैठे है डीईओ

श्योपुर,
जिला शिक्षा अधिकारी वकील सिंह रावत के खिलाफ मुरैना जिले के सबलगढ़ पुलिस थाने में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज है। इसके बाद भी वे श्योपुर जिला शिक्षा अधिकारी बनकर बैठे है। एक पद पर दो की नियुक्ति,अपात्र को मदरसा बोर्ड का प्रभार देने और अवकाश स्वीकृत करने के नाम पर वसूली करने जैसे नियम विरुद्ध कार्य भी उनके द्वारा किए गए है। यह आरोप जिले के कांग्रेसी नेताओ ने गुरुवार को प्रेस वार्ता कर लगाए और कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली से मप्र की कांग्रेस सरकार की छवि धूमिल हो रही है। इसलिए जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल निलंबित करते हुए उनके नियम विरुद्ध कार्यो की जांच कराई जाए।
जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल सिंह चौहान,पूर्व नपाध्यक्ष ओम राठौर, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भीमसेन शर्मा,शौकतउल्ला खान,प्रहलाद सेन,छोटेलाल सेमरिया आदि कांग्रेसी नेताओ ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि वर्ष 1994-95 में जब वकील ङ्क्षसह रावत एक अशासकीय विद्यालय एसके उमावि गोहटा के प्राचार्य थे। तब उनके द्वारा एक छात्र बाके बिहारी शर्मा को 12 वीं की बोर्ड परीक्षा दो विद्यालयो से दिलवा दी गई है। जिसमें एक विद्यालय उनका और दूसरा विद्यालय उनके मित्र मातादीन पलिया का मुरैना जिले के मांगरोल में संचालित एमआरडी विद्यालय था। बांके बिहारी शर्मा को परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त होने पर गोल्ड मेडल प्राप्त दिया गया। मगर शिकायत होने पर यह फर्जीवाडा उजागर हो गया।जिसकारण मुरैना जिले के सबलगढ़ पुलिस थाने में वर्ष 1998 मे वकील सिंह रावत, मातादीन पलिया, पुरुषोत्तम व्याख्याता एवं छात्र बांके बिहारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। वकील सिंह रावत के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश भी किया गया।
पत्रिका में उठा नियम विरुद्ध नियुक्ति का मामला
कांग्रेसी नेताओ ने कहा कि डीईओ के द्वारा एक पद पर दो की नियम विरुद्ध नियुक्ति और मदरसा बोर्ड का प्रभार 150 किमी दूर विद्यालय के हमीद खान नाम के ऐसे शिक्षक को दे दिया गया,जिसका अभी शिक्षा विभाग में न तो संविलियन हुआ और न ही वह उर्दू विषय से पदस्थ है। यह मामले पत्रिका ने उजागर किए। मगर इन मामलों में भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
स्वयं की नियुक्ति में छिपाई एफआईआर की जानकारी
कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा अधिकारी वकील सिंह रावत की शिक्षा विभाग में नियुक्ति भी फर्जी है। क्योंकि उनका अशासकीय विद्यालय वर्ष 2001 में शासनाधीन हुआ।यह तत्समय प्राचार्य की नियुक्ति की पात्रता नहीं रखते थे। लेकिन इनके द्वारा वर्ष 1998 में दर्ज पुलिस प्रकरण की जानकारी विभाग को न देकर शिक्षाकर्मी के पद पर नियुक्ति ले ली और फिर विभाग में सांठगांठ कर प्राचार्य बन गए। कांग्रेसी नेताओ ने यह भी आरोप लगाया कि वकील सिंह रावत को न तो ठीक लिखना आता है और न ही अंग्रेजी पढऩा। इसके बाद भी वे जिला शिक्षा अधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर रहकर अनियमितता कर रहे है। कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि इस मामले की शिकायत जिले के प्रभारी मंत्री सहित शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री तक भी पहुंचाई जाएगी।