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आज कूनो में बढ़ रहा चीतों का कुनबा, अफ्रीका से एयरफोर्स का विमान ला रहा तीसरा बड़ा जत्था

Kuno National Park : कूनो नेशनल पार्क में आज चीतों का कुनबा और बढ़ने जा रहा है। अफ्रीकी महाद्वीप के बोत्सवाना से तीसरा बड़ा जत्था इंडियन एयरफोर्स के विमान से बस कुछ देर में एमपी की घरती पर कूनो नेशनल पार्क उतरने वाला है।

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Kuno National Park

आज कूनो में बढ़ रहा चीतों का कुनबा (Photo Source- Patrika)

Kuno National Park : अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था बस कुछ देर में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क की धरती पर उतरने वाला है। बोत्स्वाना से एयरलिफ्ट किए गए 8 चीते (इनमें 6 मादा और 2 नर) विशेष विमान से पहुंच रहे हैं। बस कुछ देर… और कूनो एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। अफ्रीका से आए फर्राटेदार धावक अब कूनों के जंगलों में वन पारिस्थितिकी को समृद्ध करेंगे।

बोत्स्वाना से चीतों की सुरक्षित अनलोडिंग इमिग्रेशन, कस्टम, पशु-चिकित्सा एवं सुरक्षा औपचारिकताएं पूर्ण किए जाने के बाद आज 28 फरवरी 2026 की सुबह 8:30 बजे ग्वालियर से भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों से चीतों को कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना किया जाएगा। चीते प्रातः 9:30 बजे कूनो नेशनल पार्क पहुंचेंगे। उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड बनाए गए हैं। पूरा अभियान अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत पूरा किया जा रहा है। पार्क में बाड़े बनाए गए हैं, जहां चीते करीब एक माह क्वारंटाइन रहेंगे।

सफल प्रजनन के चरण में 'प्रोजेक्ट चीता'

'प्रोजेक्ट चीता' अब अपने प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर स्थायी स्थापना और सफल प्रजनन के चरण में पहुंच चुका है। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 मौजूदा समय में कूनो में पूरी तरह स्थापित हो चुके हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं। इनमें से 3 चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्में 10 शावक जीवित और स्वस्थ हैं।

ये मादा चीता दे चुकीं भारत में शावकों को जन्म

भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता 'मुखी' ने 5 शावकों को जन्म दिया है जो इस परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। वहीं, 'गामिनी' दूसरी बार मां बनी है। उसकी पहली गर्भावस्था से जन्में 3 सब-एडल्ट शावक स्वस्थ हैं और हाल ही में उसने 4 नए शावकों को जन्म दिया है। 'वीरा' अपने 13 महीने के शावक के साथ खुले जंगल में विचरण कर रही है, जबकि 'निर्वा' अपने 10 माह के तीन शावकों के साथ संरक्षित बाड़े में है।

वन्यजीव संरक्षण के इतिहास का सशक्त उदाहरण

एशिया से लुप्त हो चुके चीतों का मात्र 3 साल में सफल पुनर्स्थापन भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक सशक्त उदाहरण है। प्रजनन करती मादा चीतों, स्वस्थ दूसरी पीढ़ी के शावकों और नए आवासों में विस्तार के साथ ये स्पष्ट है कि, चीता अब भारत की वन पारिस्थितिकी का पुरी तरह से अभिन्न अंग बन चुका है।

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