
मध्य प्रदेश का श्योपुर जिला देश भर में कुपोषण के लिए बदनाम रहा है। कुपोषण से मौत का मामला हो या फिर मानसिक और शारीरिक विकलांगता सबसे ज्यादा भयावह स्थिति इसी जिले की रही। वहीं अब यहां मासूमों के दिल में छेद के मामले भी सबसे ज्यादा सामने आए हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले 10 साल में यहां डेढ़ सौ से ज्यादा बच्चों के दिल के छेद के ऑपरेशन किए जा चुके हैं। हालांकि ये खबर राहत देने वाली है।
दरअसल मासूमों को जन्म के साथ ही दिल का दर्द मिल रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बच्चों में जन्मजात दिल में छेद पाया जा रहा है। जिसका समय पर पता लगने से छुटकारा पाया जाना संभव है, लेकिन देरी से पता चलने पर जान का खतरा बना रहता है। हालांकि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत दिल में छेद वाले बच्चों के नि:शुल्क ऑपरेशन भी कराए जाते हैं, लेकिन यदि ऐसे बच्चों को जल्द ही चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिली तो दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं। और मासूम बच्चों की जिदंगी पर संकट आ सकता है।
10 साल में 150 बच्चों के हुए नि:शुल्क ऑपरेशन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की विभिन्न बीमारियों का नि:शुल्क उपचार कराया जाता है। यही वजह है कि वर्ष 2014 से शुरू हुए इस कार्यक्रम के अंतर्गत श्योपुर जिले में अभी तक बीते 10 सालों 150 बच्चों के दिल में छेद के निशुल्क ऑपरेशन किए जा चुके हैं। आरबीएसके की जिला प्रभारी स्नेहलता गुर्जर बताती हैं कि विभिन्न शिविरों और अस्पतालों में नियमित चेकअप के माध्यम से हम दिल में छेद वाले बच्चों को चिह्नित करते हैं, फिर उनका भोपाल में नि:शुल्क उपचार कराया जाता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अप्रैल 2023 से जनवरी 2024 तक के किए गए कार्य की रिपोर्ट जारी की है, उसके तहत बच्चों के दिल में छेद होने के मामले सबसे अधिक इंदौर, फिर बालाघाट और भोपाल में हैं। इंदौर में जनवरी से अब तक 122, बालाघाट में 86, भोपाल में 79, खरगोन में 61 आपरेशन किए गए हैं। अभी तक पूरे प्रदेश में 1234 नवजातों के आपरेशन किए जा सके हैं। अभी भी विभिन्न जिलों में 150 बच्चों के आपरेशन किए जाने हैं, जिसकी मानीटरिंग राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम कर रही है।
वहीं बच्चों में दिल के छेद के मामले कम हो सकें, इसलिए स्वास्थ्य विभाग प्रथम चरण में अब गर्भवतियों पर फोकस करेगा। इसमें गांव-गांव की महिलाओं को गर्भवस्था के दौरान मेडिकल ट्रीटमेंट फालो करने के लिए काम किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे समय से पहले होने वाले प्रीमैच्योर नवजातों की संख्या में कमी लाई जा सकेगी।
कई बार जवानी तक टॉपिक एक्सपर्ट...
छिपे रहते हैं लक्षण चिकित्सकों के मुताबिक यूं तो दिल में छेद की बीमारी जन्मजात होती है, लेकिन कई बार लक्षण जवानी तक पता नहीं चल पाते। कई बार बच्चों में इसके लक्षण जल्दी दिख जाते हैं तो कई में जवानी तक छिपे रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु व कम उम्र के बच्चों की सर्जरी कर दिल के छेद को बंद कर दिया जाता है, लेकिन युवावस्था में सर्जरी करना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में उन्हें हार्ट ट्रांसह्रश्वलांट के लिए ही इंतजार करना पड़ता है। यह भी काफी मुश्किल होता है।
इन लक्षणों को न करें इग्नोर
नवजात शिशुओं में
चिड़चिड़ापन
लगातार रोते रहना
सांसें तेज चलना
अत्यधिक पसीना आना
फीड कराने में परेशानी होना
बच्चे का वजन सामान्य से कम होना
कुछ बच्चों में त्वचा का रंग बदल जाना जैसे नीली पड़ जाना (सायनोसिस)
छाती में पानी जमा होना
पैरों में सूजन
छोटे बच्चों में
- विकास प्रभावित होना
- कमजोरी महसूस होना
- थकान
- सामान्य गतिविधियों में भी सांस फूलना
- कुछ बच्चों में छाती में दर्द, चक्कर आना या बेहोशी छा जाना
वयस्कों में
वयस्क होने तक लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, कभी-कभी उपचार के वर्षों बाद भी लक्षण वापस आ सकते हैं.
- वयस्कों में दिखायी देने वाले प्रमुख लक्षण
- हृदय की धड़कनों का असामान्य हो जाना
- नीली त्वचा, होंठ और हाथों के नाखून (सायनोसिस)
- सांस फूलना
- थोड़ा-सा भी काम करने पर अत्यधिक थकान महसूस होना
- शरीर के अंगों या उतकों का सूज जाना (इडेमा)
कैसे होती है डायग्नोसिस
सीएचडी का डायग्नोसिस अक्सर नवजात शिशुओं में जन्म के समय या जन्म के पहले ही हो सकता है। इस स्थिति का पता प्री-नैटल अल्ट्रा साउंड स्क्रीनिंग में चलता है। बच्चे की हृदय की स्थिति पता चलने पर डॉक्टरों के लिए बच्चे के हृदय के विकास को मॉनिटर करना और उसके लिए उचित प्रबंधन और उपचार योजना बनाना संभव होता है। जिन बच्चों में सीएचडी होता है उनमें कई लक्षण दिखाई देते हैं, जो इसपर निर्भर करते हैं कि समस्या की गंभीरता कितनी है। मेडिकल टेक्नोलॉजी में विकास से बच्चे के जन्म के पहले ही कुछ हृदय संबंधी विकृतियों का पता लगाना संभव है।
जन्मजात दिल में छेद अनुवांशिक कारणों से
बच्चों में दिल में छेद होने का मुख्य कारण आनुवांशिकता है, लेकिन कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। ऐसे में समय पर इलाज नहीं होने पर उनकी जान को खतरा रहता है। जल्दी पता लगने पर कई नवीन तकनीकों से इसका इलाज संभव है। इसमें बच्चे के शरीर में नीलापन दिखाई देना, मां के दूध के सेवन में परेशानी होना, बार-बार निमोनिया होना, वजन न बढ़ना, असमान्य धड़कन, शारीरिक विकास न होना आदि कुछ लक्षण हो सकते हैं। लिहाजा परिजन बच्चों में लक्षण व उनकी शिकायत की अनदेखी नहीं करें। तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
- डॉ.संजय मंगल, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल श्योपुर
Updated on:
19 Feb 2024 09:28 am
Published on:
19 Feb 2024 09:15 am

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