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जीवन में आनंद भर देती है ‘आनंदी माताÓ

-अति प्राचीन हैशहर का आनंदी माता मंदिर,प्रचलित हैं कई किवदंतियां

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जीवन में आनंद भर देती है 'आनंदी माताÓ

जीवन में आनंद भर देती है 'आनंदी माताÓ

श्योपुर,
तिलचौथ (संकटचतुर्थी) का पर्व सोमवार को शहर सहित जिले भर में परंपरागत रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान शहर के सूबात कचहरी स्थित आनंदी माता मंदिर पर महाआरती और छप्पन भोग लगाया जाएगा। शहर के मध्य स्थित पुरानी कचहरी के पास श्री आनंदी माता का मंदिर काफी प्राचीन है।आनंदी माता के दर्शनों मात्र से ही श्रद्धालुओं के जीवन में आनंद भर जाता है।
आनंदी माता का रूप महिषासुर मर्दिनी का है। जिसके दर्शन मात्र से जहां लोगों को तत्काल आत्मिक शांति प्राप्त होती है, वहीं उनके बिगड़े काम भी बन जाते हैं और लोगों के यहां पर आनन्द हो जाते हैं। बताते हैं कि यह मंदिर अति प्राचीन है, जिसका ग्वालियर रियासत के समय करीब डेढ़ सौ साल पूर्व नवनिर्माण कराया गया।तब भी यहां पर घोर जंगल होता था तथा मंदिर जमीन की सतह से नीचे था। जहां पर बियावान जंगल होने से शेर भी आया जाया करते थे। इस मंदिर में महिषासुर मर्दिनी के अलावा माता की मूर्ति के ठीक सामने भैरोजी की प्रतिमा है तथा दाहिनी ओर शंकर पार्वती परिवार है। यह भी उतने ही पुराने है जितनी पुरानी माता की मूर्ति एवं मंदिर है। बताया गया है कि पूर्व में नवरात्रा में नवमी की रात्रि को भैंसे की बलि भैरोंजी को दी जाती थी उस समय मां की गर्दन कुछ क्षण के लिये सीधी हो जाती थी। लोगों का मानना है कि अब भी नवमी के दिन कुछ पल के लिए मां की गर्दन सीधी होती है।
फूलबंगला और छप्पन भोग आज
मंदिर के पुजारी कैलाशचंद शुक्ला ने बताया कि तिल चौथ के अवसर पर राजराजेश्वरी आनंदी माता मंदिर पर सोमवार को फूल बंगला सजाया जाएगा, वहीं छप्पन भोग लगाया जाएगा। इस दौरान शाम 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन होंगे, जबकि रात्रि 8 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा।